फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड-1073 में घटी घटना ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि देश, उसकी परिसंपत्तियों और मानव जीवन की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं। पायलट हो या इंजीनियर, वैज्ञानिक, किसान, व्यवसायी, शिक्षक या छात्र, जब राष्ट्र की अस्मिता या मानवीय सुरक्षा का प्रश्न उठे, तो हर नागरिक को निर्भीक खड़ा होना चाहिए। यही अदम्य साहस भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने दिखाया।
बुधवार, 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही बोइंग 737 मैक्स-8 पर उत्तरी सऊदी अरब के आकाश में हाइजैक कोड जारी हुआ। ओमानी सह-पायलट ने कैप्टन मछार पर चाकू से हमला कर कॉकपिट पर काबिज होने की कोशिश की। विमान हजारों फीट नीचे गिरने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मछार ने विरोध किया, कॉकपिट का दरवाजा खोला और यात्रियों व क्रू को हमलावर पर हावी होने का अवसर दिया। सवार 174 लोगों में मौजूद दो योग्य पायलटों ने विमान को तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतारा। सऊदी अधिकारियों ने आपातकालीन सहायता दी और सभी यात्री बाद में इजरायल पहुँचे।
इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कैप्टन स्मित मछार हीरो हैं। गंभीर खतरे और घावों के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने का अटूट संकल्प दिखाया। भारत उन पर गर्व करता है।” इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनकी वीरता को सलाम किया और कहा कि उन्होंने 174 जानें बचाईं।
यह घटना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आतंक और हिंसा आज किसी एक सीमा तक सीमित नहीं। नागरिक विमानन, जो आधुनिक अर्थव्यवस्था और कूटनीति की रीढ़ है, भी निशाना बन सकता है। ऐसे में व्यक्तिगत साहस और सामूहिक जिम्मेदारी ही सबसे प्रभावी रक्षा कवच है। कैप्टन मछार का कृत्य याद दिलाता है कि राष्ट्ररक्षा कोई एकांगी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा प्रतिबद्धता है। उनकी शीघ्र स्वस्थता की कामना के साथ हम इस सत्य को आत्मसात करें।


