प्रदेश के 7 लाख कर्मचारी डीए में फिर पिछड़ेंगे, 31 फीसदी पर ही करना पड़ेगा सब्र

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को 11 फीसदी डीए (महंगाई भत्ता) बढ़ाकर खुश कर दिया। लेकिन प्रदेश के करीब 7 लाख अधिकारी-कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारियों से फिर पिछड़ जाएंगे। केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 3 फीसदी बढ़ सकता है। इसके बाद डीए 34 फीसदी हो जाएगा। वहीं, प्रदेश के कर्मचारियों को 31 फीसदी डीए पर ही सब्र करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार 16 मार्च को डीए बढ़ाने पर फैसला कर सकती है। इसे लेकर मध्यप्रदेश के कर्मचारी संगठन फिर से सक्रिय हो गए हैं। हालांकि, 5 मार्च को ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बर्थडे पर कर्मचारियों को तोहफा दिया था और डीए 31 फीसदी करने की घोषणा की थी। यह 1 अप्रैल से मिलेगा। इसके बाद केंद्र और प्रदेश के कर्मचारियों का डीए 31-31 फीसदी हो गया। बराबरी पर आने से स्टेट के कर्मचारी खुश थे, लेकिन 16 मार्च से केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में फिर से 3 फीसदी तक इजाफा होने की बात सामने आई है। ऐसा होने पर डीए में स्टेट के कर्मचारी फिर पिछड़ जाएंगे।

पांच महीने में दो बार डीए बढ़ाया

शिवराज सरकार ने पिछले पांच महीने में दो बार डीए बढ़ाया है। अक्टूबर-21 में 12फीसदी और 5 मार्च-22 को 11 फीसदी डीए बढ़ाने का ऐलान किया गया। हालांकि, एरियर पर सरकार की चुप्पी सामने आ रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि एरियर कैसे और कितना मिलेगा, इसकी तस्वीर सरकार ने साफ नहीं की है। इसके चलते कर्मचारी अपने हिसाब से कैलकुलेशन कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार ने लंबे समय से डीए नहीं बढ़ाया था। कोरोना इसकी वजह बताई जा रही थी। इस कारण कर्मचारियों का काफी आर्थिक नुकसान हो चुका है।

प्रदेश में 7 लाख अधिकारी-कर्मचारी

बता दें, प्रदेश में आईएएस, आईपीएस, आईएमएस, राज्य सरकार के अधिकारी-कर्मचारी, व शिक्षक सहित 6.40 लाख नियमित और 60 हजार के करीब कार्यभारित कर्मचारी शामिल हैं। अब तक इन्हें 20 फीसदी ही डीए मिल रहा था। 1 अप्रैल से 11 फीसदी डीए बढऩे के बाद यह 31फीसदी हो जाएगा।
Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।