आर्मी चीफ का पहला LOC दौरा: सीमा पर सतर्कता और समृद्धि का समन्वय

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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भारतीय सेना के नए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पदभार संभालने के बाद अपनी पहली अग्रिम क्षेत्र यात्रा में जम्मू-कश्मीर के पूंछ, राजौरी और सुंदरबानी क्षेत्रों का दौरा किया। लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर तैनात व्हाइट नाइट कोर के जवानों के साथ इस यात्रा ने न केवल परिचालन तैयारियों की समीक्षा की, बल्कि सीमा सुरक्षा की समसामयिक चुनौतियों और समाधानों पर गहन अंतर्दृष्टि भी प्रदान की।

जनरल सेठ ने विस्तृत ब्रिफिंग के दौरान सुरक्षा परिदृश्य, आतंकवाद-विरोधी ग्रिड, परिचालन तैनाती, निगरानी ढांचे, क्षेत्रीय नवाचारों तथा एकीकृत युद्धक तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मौजूदा बुनियादी ढांचे के विकास और स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से भारत के ‘प्रथम गांवों’ को सशक्त बनाने वाली जन-केंद्रित पहलों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया। सेना प्रमुख ने सभी रैंकों की परिचालन उत्कृष्टता और अटूट समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें मिशन-फोकस्ड, परिचालन रूप से चुस्त तथा निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रोत्साहित किया।

यह यात्रा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और घुसपैठ की चुनौतियों के बीच भारतीय सेना का यह सतर्क रुख दर्शाता है कि सीमा पर ‘शांति के लिए शक्ति’ की नीति अब भी मजबूती से लागू है। पूंछ-राजौरी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील रहा है, जहां आतंकियों की सक्रियता को आधुनिक निगरानी प्रणालियों, ड्रोन-आधारित टोह और फील्ड इनोवेशंस के माध्यम से प्रभावी ढंग से रोका जा रहा है। जनरल सेठ की यात्रा न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि उच्च नेतृत्व क्षेत्रीय वास्तविकताओं से सीधे जुड़ा हुआ है।

सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी यात्राएं ‘बॉटम-अप फीडबैक’ सुनिश्चित करती हैं, जिससे नीति निर्माण और क्षेत्रीय अनुकूलन में सुधार होता है। साथ ही, लोगों के साथ सेतु निर्माण की पहलें ‘हार्ट्स एंड माइंड्स’ अभियान को नई गति देती हैं, जो लंबे समय में सीमा क्षेत्रों में स्थिरता लाने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकती हैं।

जनरल धीरज सेठ की यह पहल नई नेतृत्वशैली का प्रतीक है, जिसमें परिचालन सतर्कता के साथ-साथ मानवीय और विकासात्मक आयाम भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जब भारत क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब सेना की इस तैयार स्थिति और नेतृत्व की सक्रियता देश के लिए विश्वास का विषय है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families