पिनाका एलआरजीआर राकेट का सफल परिक्षण: भारतीय रक्षा क्षेत्र में मील का पत्थर

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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8 जुलाई को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) में डीआरडीओ ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर) का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस परीक्षण में रॉकेट ने उपयोगकर्ता द्वारा निर्धारित न्यूनतम 60 किलोमीटर की दूरी पर लक्ष्य को पूर्ण सटीकता के साथ भेदा। परीक्षण के दौरान रॉकेट ने सभी पूर्व निर्धारित उड़ान गतिमान (मैन्यूवर्स) सफलतापूर्वक पूरे किए और भविष्यवाणी की गई ट्रैजेक्टरी का अनुसरण करते हुए टेक्स्टबुक प्रेसिजन के साथ लक्ष्य पर आघात किया। रेंज के सभी उपकरणों ने पूरे प्रक्षेपपथ पर निगरानी रखी।

आरडीई (आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट) और अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित यह प्रणाली मौजूदा पिनाका लॉन्चर से ही 120 किलोमीटर तक की मारक क्षमता प्रदान करती है। यह क्षमता भारतीय थलसेना को गहन हमले (डीप स्ट्राइक) की विश्वसनीय क्षमता प्रदान करती है। वर्तमान में थलसेना पिनाका रेजिमेंट्स को 22 तक विस्तारित करने की योजना पर कार्यरत है। एलआरजीआर इस विस्तार में महत्वपूर्ण खाई को भरने वाला साबित होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं में एक बड़ा मील का पत्थर बताया। सीमा पर जारी तनाव के बीच यह उपलब्धि सामरिक दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है। पारंपरिक आर्टिलरी की सीमाओं को पार करते हुए गाइडेड रॉकेट प्रौद्योगिकी दुश्मन की गतिशीलता को बाधित करने, कमांड पोस्ट्स को निशाना बनाने और लॉजिस्टिक हब्स पर सटीक आघात करने की क्षमता बढ़ाती है।

पिनाका एलआरजीआर न केवल रेंज और सटीकता में उन्नत है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का जीवंत उदाहरण भी है। डीआरडीओ की यह सफलता विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी हथियार प्रणालियों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

`रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य के युद्ध क्षेत्रों में बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) संचालन में ऐसी सटीक लंबी दूरी की आर्टिलरी प्रणालियाँ निर्णायक भूमिका निभाएंगी। पिनाका एलआरजीआर भारतीय सेना को सीमा पर विश्वसनीय निरोधक क्षमता प्रदान करते हुए क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करेगा।

यह परीक्षण न केवल प्रौद्योगिकी की सफलता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक सशक्त संदेश भी है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families