देश में गेहूं के निर्यात पर रोक लगने के दो माह बाद एक बार फिर गेहूं के दाम में उछाल आया है। वही अब से आटा, दही सहित कई खाद्य सामग्रियों पर जीएसटी लगने से दाम और ज्यादा चुकाने होंगे। हालांकि किसानों को गेहूं बिक्री पर पहले की अपेक्षा 200-250 रुपए प्रति क्विंटल अधिक दाम मिल रहे हैं। इसके चलते मंडियों में गेहूं की आवक भी बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने 13 मई को भारत से निर्यात होने वाले गेहूं पर एकाएक रोक लगा दी थी। इसके चलते गेहूं के दाम 1800-1950 रुपए पर पहुंच गए थे। जबकि इसके पहले गेहूं समर्थन मूल्य पर 2015 रुपए से अधिक 2100 रुपए से ऊपर बिक रहा था।
बता दें कि मार्च अप्रैल और 15 मई तक किसानों का गेहूं प्रदेश सरकार के समर्थन मूल्य के ऊपर बिक रहा था। इसके चलते जिले में लक्ष्य के मुताबिक 50 फीसदी ही सरकारी खरीदी हो पाई थी।
5 हजार एमटी से अधिक की आवक
अप्रैल-मई के बाद अब जुलाई में कृषि उपज मंडियों में गेहूं की आवक एकाएक बढ़ गई है। 10 जुलाई के बाद से देखा जाए तो शायद ही मंडियों में खरीदी का आंकड़ा 5 हजार मीट्रिक टन से कम देखने को मिले। जिला मुख्यालय के अलावा काफी संख्या में किसान अपने गेहूं की फसल लेकर कृषि उपज मंडियों में पहुंच रहे हैं।
एफसीआई के नहीं हुए टेंडर
गल्ला कारोबारियों की मानें तो अचानक से गेहूं में उछाल की वजह गेहूं की शार्टेज भी है, क्योंकि काफी मात्रा में गेहूं निर्यात हो चुका है। वहीं अभी भारतीय खाद्य निगम के टेंडर भी नहीं हुए जिससे व्यापारी अपने मांग की पूर्ति कर सके। जबकि एफसीआई अपना गेहूं ओपन मार्केट में व्यापारियों को बेचने के लिए जुलाई महीने में टेंडर की प्रक्रिया पूरी करवा देती थी। अब गल्ला कारोबारियों को डर सता रहा है कि आगे अगर गेहूं नहीं मिला तो फ्लोर मिल और बाहर गेहूं की खेप कैसे भेजेगे।


