मध्य प्रदेश में निजी कॉलेजों की फीस में ऐतिहासिक कटौती! AFRC ने 2026-27 सत्र के लिए B.Ed. और लॉ कोर्स की फीस घटाई ?

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MP Education News। मध्य प्रदेश के निजी उच्च शिक्षा संस्थानों के लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति (AFRC) ने सत्र 2026-27 के लिए निजी गैर-अनुदान प्राप्त संस्थाओं के B.Ed., B.B.A. LL.B. (Hons.) और B.Com LL.B. (Hons.) जैसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों की प्रोविजनल फीस अस्थाई रूप से कम कर दी है।

समिति के सचिव प्रो. अनिल शिवानी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 8 मई 2026 को आयोजित बैठक में ये फैसले लिए गए। पूरी सूची परिशिष्ट-1 के रूप में उच्च शिक्षा आयुक्त को भेज दी गई है।

नई फीस विवरण (प्रति वर्ष) – कोर्स,AFRC द्वारा निर्धारित प्रोविजनल फीस

  • B.B.A. LL.B. (Hons.),”₹25,000″
  • B.Com LL.B. (Hons.),”₹25,000″
  • B.Ed. (प्रदेश के अधिकांश निजी कॉलेज),”₹32,000″

यह फीस पूरे मध्य प्रदेश के सैकड़ों निजी कॉलेजों पर लागू होगी — भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, मुरैना, छतरपुर, बालाघाट, खरगोन, धार, देवास, होशंगाबाद, कटनी, मंदसौर आदि सहित लगभग सभी जिलों में।

विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत

B.Ed. करने वाले हजारों अभ्यर्थी, जो शिक्षक बनने का सपना देखते हैं, अब कम खर्च में पढ़ाई कर सकेंगे। लॉ के 5 वर्षीय एकीकृत कोर्स भी अब अधिक किफायती हो गए हैं। महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में फीस में कमी अभिभावकों के आर्थिक बोझ को हल्का करेगी। एक अभिभावक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “B.Ed. की फीस 40-50 हजार से घटकर 32 हजार होना हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है।”

कॉलेज संचालकों की चिंता और विरोध

दूसरी तरफ निजी संस्थान संचालकों में इस फैसले को लेकर काफी नाराजगी है। कई प्रबंधक मानते हैं कि, स्टाफ की सैलरी, बिजली-पानी, लाइब्रेरी, लैब और इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च लगातार बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं, रिजल्ट और प्रशासनिक कार्यवाही में पहले से ही काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इतनी कम फीस में गुणवत्ता बनाए रखना और संस्थान चलाना बेहद कठिन होगा।

एक कॉलेज संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “फीस कम करना विद्यार्थियों के हित में तो है, लेकिन इससे शिक्षा की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी। सरकार को हमारी समस्याओं पर भी विचार करना चाहिए — अन्यथा कई छोटे-मध्यम कॉलेज बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।”

AFRC का रुख

समिति ने स्पष्ट किया है कि यह फीस प्रोविजनल (अस्थायी) है। अंतिम फीस बाद में तय की जाएगी। यह फैसला विद्यार्थियों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। AFRC का यह निर्णय विद्यार्थी-हितैषी है, लेकिन निजी शिक्षा क्षेत्र की वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार फीस नियंत्रण के साथ-साथ निजी संस्थानों को कुछ राहत पैकेज (जैसे बिजली दर में छूट, लैंड टैक्स में रियायत या डायरेक्ट सब्सिडी) भी दे ताकि गुणवत्ता compromised न हो।

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