सावधानी में समझदारी: 26 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक संयम का समय

जल्दबाजी नहीं, धैर्य और विवेक से निर्णय लें — अस्थिर काल के बाद अनुकूल समय

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

श्री विनोद जैन (प्रभु), ज्योतिषाचार्य, इंदौर
दैनिक सदभावना पाती

Top Astrologer in Indore। ग्रह-नक्षत्रों की वर्तमान चाल के अनुसार 26 फरवरी 2026 से 20 मार्च 2026 तक का समय एक प्रकार से उठापटक, भ्रम और निर्णय अस्थिरता का काल माना जा रहा है। यह ऐसा समय है जिसमें परिस्थितियाँ सोच के विरुद्ध, समझ के विपरीत और निर्णयों के खिलाफ जा सकती हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से यह अवधि पृथ्वी स्तर पर नकारात्मक ऊर्जा और असंतुलन का प्रभाव लिए हुए मानी जा रही है, इसलिए सावधानी और समझदारी ही सर्वोत्तम मार्ग बताया गया है।

इस अवधि में विशेष रूप से लोगों को विचारों के मतभेद, मनभेद और गलतफहमी से बचने की सलाह दी गई है। किसी भी प्रकार का बड़ा निर्णय जल्दबाजी में न लें और न ही भावावेश या तनाव में कोई कदम उठाएँ। यदि कोई नया बड़ा प्रोजेक्ट या पहल शुरू करनी हो तो उसे 21 मार्च 2026 के बाद प्रारंभ करना अधिक शुभ माना गया है। वर्तमान समय को पुराने लंबित कार्यों के समाधान, पेंडिंग कार्यों के निराकरण और अधूरे कार्य पूर्ण करने में लगाना अधिक उचित रहेगा।

26 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक संयम का समय

बुध ग्रह के प्रभाव के कारण इस अवधि में बुद्धि और विवेक भ्रमित या मिसगाइड होने की संभावना रहती है, इसलिए किसी भी बात को बढ़ा-चढ़ाकर विवाद का रूप न दें। छोटी बातों को तूल न दें और वाणी पर संयम रखें। किसी पर अत्यधिक भरोसा न करें और हर परिस्थिति को समझकर, परखकर आगे बढ़ें। यदि कोई समस्या आए तो उसका शांतिपूर्वक समाधान निकालें, विवाद से बचें।

यदि कार्यस्थल, कंपनी, वित्त या प्रबंधन से जुड़ा तनाव आए, या किसी और की गलती का आरोप आप पर आए, तो धैर्य और संयम से सोचकर ही निर्णय लें। यह समय मानसिक संतुलन, विवेक और व्यावहारिक परिपक्वता की परीक्षा का काल है। विश्व स्तर पर भी विचार, संवाद, निर्णय और समझ के स्तर पर असंतुलन का प्रभाव रहने की संभावना मानी गई है, जिसे सही दृष्टिकोण और संयम से संभाला जा सकता है।

कुल मिलाकर यह काल डर का नहीं, बल्कि सावधानी और आत्मसंयम का है। कुछ समय का यह अस्थिर दौर पार होते ही परिस्थितियाँ पुनः अनुकूल और आनंदमय होने के संकेत हैं। धैर्य, शांति और समझदारी से समय को साध लेने पर कोई बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं होगी।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।