विशेष ज्योतिषीय बुलेटिन: मई-जून 2026 में ग्रहों का महा-परिवर्तन और वैश्विक उथल-पुथल

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ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर

इंदौर। 02 मई 2026 से 15 जून 2026 तक का समय ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और परिवर्तनकारी माना जा रहा है। इस अवधि में प्रमुख ग्रहों के गोचर और विशेष रूप से पुरुषोत्तम अधिक मास का प्रभाव विश्व और भारत दोनों के लिए बड़े बदलावों के संकेत दे रहा है।

मंगल-सूर्य का अग्नि प्रभाव: महंगाई और तनाव के संकेत –
11 मई 2026 को मंगल ग्रह अपनी स्वयं की मेष राशि के अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, वहीं सूर्य ग्रह कृतिका नक्षत्र में स्थित रहेंगे। अग्नि तत्व प्रधान इन दोनों ग्रहों के प्रभाव से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन पदार्थों में तेजी का माहौल बनेगा, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुओं के मूल्यों में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसी अवधि में आगजनी और रक्त संबंधी घटनाओं में वृद्धि, साथ ही वायुयान एवं रेलवे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। मंगल और सूर्य के उग्र स्वभाव के कारण समाज में तनाव, वाद-विवाद और आपसी टकराव की स्थितियां बढ़ सकती हैं।

पुरुषोत्तम अधिक मास: धर्म और आस्था का विशेष काल –
17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में पुरुषोत्तम अधिक मास प्रारंभ होगा। इस अवधि में शनि ग्रह मीन राशि के रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, वहीं 02 जून 2026 को गुरु ग्रह कर्क राशि में अपने उच्च स्थान एवं पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे। गुरु के इस शुभ प्रभाव से भारत में धर्म और आध्यात्मिकता की प्रभावना बढ़ेगी तथा विभिन्न समाजों में धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। अधिक मास में किए गए मंत्र, जाप, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्यों का विशेष फल प्राप्त होगा, जिससे यह अवधि आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाएगी।

राजनीतिक संकेत: सत्ता परिवर्तन और वैश्विक अस्थिरता –

ग्रहों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि इस अवधि में भारत सहित विश्व के कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है। शासकों के बीच मतभेद, सत्ता के लिए संघर्ष और आपसी टकराव की स्थितियां बनेंगी। कई देशों में प्रदर्शन, बंद और आंदोलन का वातावरण देखने को मिल सकता है। भारत में भी मंत्रिमंडल में बड़े परिवर्तन और राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिससे शासन व्यवस्था में बदलाव संभव है।

प्रकृति का प्रकोप: मौसम और आपदाओं का खतरा –
ग्रहों के जल और वायु तत्व पर प्रभाव के कारण प्राकृतिक आपदाओं की संभावना भी बढ़ रही है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में भूकंप, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, आंधी, बवंडर और तूफान की स्थितियां बन सकती हैं। समुद्र में भी उथल-पुथल के कारण तूफान आने के संकेत हैं, वहीं दक्षिण भारत में बाढ़ की संभावना व्यक्त की जा रही है। कुल मिलाकर यह समय मौसम की दृष्टि से अस्थिर और चुनौतीपूर्ण रहेगा।

विश्व परिदृश्य: युद्ध और तनाव जारी –
वैश्विक स्तर पर भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रह सकती है। रूस-यूक्रेन, इजराइल-ईरान, चीन-ताइवान और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थितियां बनी रहने की संभावना है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां तेज हो सकती हैं, जिससे विश्व में अस्थिरता और भय का वातावरण बना रहेगा।

बाजार का हाल: अस्थिरता और उतार-चढ़ाव –

इस अवधि में आर्थिक क्षेत्र में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है। सोना, चांदी, तांबा, लोहा और अन्य धातुओं के दामों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। शेयर बाजार और मुद्रा बाजार में भी भारी अस्थिरता के संकेत हैं, जिससे निवेशकों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

सार: संयम ही सुरक्षा –
गुरुदेव श्री विनोद जैन (प्रभु) के अनुसार इस संपूर्ण अवधि में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति स्वयं को शांत रखे, कम से कम बोले और किसी भी प्रकार के विवाद से बचे। यदि किसी स्थिति में विवाद की संभावना हो, तो मौन और धैर्य ही सबसे बेहतर उपाय रहेगा। यह विश्लेषण वैदिक ज्योतिष के आधार पर ग्रह-नक्षत्रों का एक संभावित आकलन है, जिसका उद्देश्य समाज को सतर्क और जागरूक करना है।

॥ ॐ नमः ॥ 🙏

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