डॉ. राजेश जौहरी
दैनिक सदभावना पाती
महू। आर्मी वॉर कॉलेज (ए.डब्ल्यू.सी) महू के इनफार्मेशन वारफेयर (आईडब्ल्यू) डिवीज़न ने अपने आईडब्ल्यू कोर्स के अंतर्गत एक विशेष मीडिया कैप्सूल का आयोजन किया, जिसमें सैन्य अधिकारियों और पत्रकारों को एक साथ लाकर धारणा निर्माण और संज्ञानात्मक क्षेत्र के अभियानों की क्षमताओं को सुदृढ़ किया गया।
ए.डब्ल्यू.सी द्वारा एक्स पर साझा किए गए आधिकारिक अपडेट के अनुसार, इस कार्यक्रम में भारतीय सैन्य बलों के अधिकारी, मित्र देशों के सैन्य कर्मी तथा पत्रकार शामिल हुए। इस पहल का उद्देश्य सशस्त्र बलों और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा इनफार्मेशन वारफेयर के तेजी से विकसित होते क्षेत्र में व्यापक वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना है।
मीडिया कैप्सूल आई डब्ल्यू कोर्स का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो प्रतिभागियों को आधुनिक संघर्ष के उन पहलुओं का प्रशिक्षण देता है जहाँ विचारों और कथाओं पर प्रभाव, पारंपरिक सैन्य अभियानों जितना ही निर्णायक होता है। सेवारत अधिकारियों, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को एक साथ लाकर यह कार्यक्रम संज्ञानात्मक क्षेत्र, जो कि धारणाओं, कथाओं और जनमत का क्षेत्र है, साझा समझ और संचालनात्मक तालमेल विकसित करने का प्रयास करता है।
महू के IW डिवीज़न द्वारा मीडिया कैप्सूल का आयोजन
रक्षा विशेषज्ञ इस आयोजन को भारतीय सेना द्वारा सूचना अभियानों में पूरे राष्ट्र के स्तर पर समन्वय को संस्थागत बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम मानते हैं। हाइब्रिड खतरे, डीपफेक और ‘वास्तविक समय में वैश्विक सूचना प्रवाहित होने’ के इस युग में प्रभावी धारणा प्रबंधन के लिए सैन्य योजनाकारों, रणनीतिक संचार विशेषज्ञों और विश्वसनीय मीडिया के बीच घनिष्ठ सहयोग आवश्यक है। मित्र देशों के अधिकारियों की भागीदारी भारत की इस महत्वपूर्ण गैर-गतिशील क्षेत्र में बहुपक्षीय साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
आर्मी वॉर कॉलेज, जो मध्य प्रदेश के महू में स्थित भारतीय सेना का एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है, पेशेवर सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। इसका आईडब्ल्यू डिवीज़न लगातार मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन्स से लेकर डिजिटल प्रभाव कैंपेन तक समकालीन चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करता रहा है। वर्तमान मीडिया कैप्सूल इसी विकास को दर्शाता है, जो सशस्त्र बलों को सूचना के माहौल में उत्पन्न खतरों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सक्षम बनाता है।
यह सहयोगात्मक मंच न केवल पेशेवर कौशल को बढ़ाता है, बल्कि भारत की रक्षा प्रतिष्ठान और लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के बीच महत्वपूर्ण सेतु को भी सुदृढ़ करता है, जिससे भविष्य में संज्ञानात्मक क्षेत्र में होने वाले अभियानों को अधिक सटीकता, विश्वसनीयता और रणनीतिक समन्वय के साथ संचालित किया जा सके।


