द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हिरोशिमा और नागासाकी की विभीषिका से झुलसे जापान ने स्थायी रूप से युद्ध, शस्त्रागार और सैन्य विस्तार का त्याग कर शांतिवादी नीति (Pacifist Stance) अपनाई थी। हालांकि, वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक संप्रभुता के संकट और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने जापान को यह अहसास करा दिया है कि बिना सैन्य शक्ति और अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय सुरक्षा का संरक्षण असंभव है। इसी रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन का परिणाम है कि जापान आज आधुनिक रक्षा तकनीकों का वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
इसी तकनीकी क्रांति का सजीव प्रमाण 1 सितंबर 2026 को पुनः उड़ान भरने वाला जापानी वायु आत्म-रक्षा बल (JASDF) का कावासाकी XEC-2 ‘प्लैटीपस‘ (Platypus) है। कावासाकी C-2 परिवहन विमान के प्लेटफार्म पर आधारित इस अनूठे सैन्य विमान को मुख्यतः ‘स्टैंड-ऑफ जैमिंग’ (Stand-off Jamming) और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) मिशनों के लिए विकसित किया गया है।
अपने अत्यधिक उभरे हुए और बड़े ‘नोज’ (Nose) तथा बाहरी इलेक्ट्रॉनिक फेयरिंग्स (Fairings) के कारण इसे ‘प्लैटीपस’ उपनाम दिया गया है। यद्यपि यह आधुनिक सैन्य विमानन के इतिहास में अपनी विचित्र बनावट के लिए जाना जाता है, परंतु दृश्यमान रूपरेखा से इतर यह दुश्मन के रडार, नेटवर्क और संचार प्रणालियों को सुरक्षित दूरी से ही पूरी तरह से निष्प्रभावी (Jam) करने में सक्षम एक घातक और अपरिहार्य सामरिक हथियार है।
जापान का यह कदम यह स्पष्ट संदेश देता है कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक गोला-बारूद से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम और तकनीकी संप्रभुता के बल पर जीते जाते हैं। भारत के दृष्टिकोण से, जापान का यह रणनीतिक परिवर्तन और उन्नत सैन्य-प्रौद्योगिकी का विकास वैश्विक शक्ति संतुलन तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक सशक्त और स्थिर सुरक्षा संरचना के निर्माण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है।


