भारतीय सेना की उत्तरी कमान ने हाल ही में एक अभिनव ‘वेटरन्स कॉन्क्लेव’ का आयोजन कर पूर्वसैनिक कल्याण के क्षेत्र में नई दिशा दी है। यह सम्मेलन केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण को संस्थागत रूप देने का सार्थक प्रयास था।
इस मंच पर रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, एडजुटेंट जनरल ब्रांच, जम्मू-कश्मीर सरकार तथा जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के सैन्य संगठनों के प्रमुख हितधारक एक साथ आए। उद्देश्य स्पष्ट था, कल्याण, पुनर्वास और संस्थागत सहायता को मजबूत करना। चर्चा के केंद्र में समकालीन चुनौतियाँ थीं। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, जागरूकता अभियान, कौशल उन्नयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष बल दिया गया। विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए सभी पक्ष एकमत रहे कि बिना सहयोग के प्रभावी समाधान संभव नहीं।
उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे पूर्वसैनिकों के कल्याण के प्रति अडिग रहें और सभी स्तरों पर सहयोगी दृष्टिकोण अपनाएँ। रक्षा मंत्रालय की पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी ने वर्चुअल माध्यम से भाग लेते हुए कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक साझा मंच पर सभी हितधारकों को लाने वाला अग्रणी प्रयास बताया।
यह सम्मेलन मात्र चर्चा तक सीमित नहीं रहा। यह दर्शाता है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा देने वाले सैनिकों के परिवारों के प्रति सैन्य नेतृत्व की संवेदनशीलता कितनी गहरी है। स्वास्थ्य, कौशल और प्रशासनिक सुविधाओं का एकीकरण यदि निरंतर जारी रहा तो यह मॉडल अन्य कमानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। पूर्व सैनिक राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं। उनके सम्मान और सहायता को संस्थागत रूप देना न केवल नैतिक दायित्व है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी आवश्यक है। उत्तरी कमान का यह प्रयास उसी दिशा में एक ठोस कदम है।


