भारतीय वायुसेना में फाइटर कंट्रोलर के रूप में दो दशक से अधिक सेवा करने वाली विंग कमांडर प्रीति ओझा की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की नहीं, बल्कि सैन्य मूल्यों की निरंतरता की भी है। 2005 में कमीशंड हुई ओझा ने देशभर के महत्वपूर्ण मोर्चों पर अपनी सेवायें दीं और तीन प्रतिष्ठित रडार इकाइयों की कमान संभाली। बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील अभियानों में उनकी भूमिका रही। पेशेवर दक्षता के लिए उन्हें एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ द्वारा दो बार प्रशंसा मिली। 30 अप्रैल 2026 को उन्होंने वर्दी उतारी, लेकिन यह अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत थी।
रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फैशन की दुनिया में कदम रखा और मिसेज वर्ल्ड इंटरनेशनल 2026 (सीजन-4) में विजेता बनीं। वर्दी से शाम के गाउन और ब्यूटी क्राउन तक का यह बदलाव बाहरी दृष्टि से नाटकीय लगता है, पर दोनों क्षेत्रों में अनुशासन, दबाव में संयम, तैयारी और नेतृत्व की मांग समान है। ओझा ने साबित किया कि सैन्य प्रशिक्षण केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, वह जीवन के हर मोर्चे पर व्यक्ति को मजबूत बनाता है।
उनकी यात्रा इस धारणा को चुनौती देती है कि पुनर्निर्माण केवल युवाओं का अधिकार है। बीस वर्ष से अधिक सेवा के बाद नए क्षेत्र में सफलता हासिल कर उन्होंने दिखाया कि उम्र या करियर परिवर्तन किसी महिला के सपनों की सीमा नहीं तय कर सकते। आज वे फिटनेस, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत विकास के संदेश के साथ महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं।
ओझा की कहानी सशस्त्र बलों की महिलाओं और सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आती है, सेवा की भावना कभी समाप्त नहीं होती, वह केवल रूप बदलती है। वर्दी ने उन्हें राष्ट्रसेवा का सामर्थ्य दिया, मंच ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मुकुट उस आंतरिक शक्ति का प्रतीक बन गया, जो उन्होंने वर्षों की कठिन मेहनत से अर्जित की। रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनके बहुआयामी योगदान का यह जीवंत उदाहरण है।


