‘शेर’ एके-203 सिर्फ असॉल्ट राइफल नहीं, आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बड़ी छलांग

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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भारतीय रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। उत्तर प्रदेश स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड संयंत्र में पूरी तरह स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल ‘शेर’ का सफल परीक्षण किया गया। यह परीक्षण मात्र एक तकनीकी घटना नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता यात्रा का ठोस प्रमाण है।

एके-203 ‘शेर’ 7.62×39 मिमी कैलिबर की शक्तिशाली असॉल्ट राइफल है। इसकी प्रभावी मारक दूरी लगभग 400 मीटर तक है, जबकि फायरिंग का रेट दर करीब 700 राउंड प्रति मिनट रहती है। 30 राउंड की मैगजीन के साथ यह सैनिक को तीव्र और निरंतर फायरिंग की क्षमता देती है। बेहतर बैलिस्टिक्स, उच्च रोक क्षमता और भारतीय परिस्थितियों में सिद्ध विश्वसनीयता इसे युद्ध के मैदान में प्रभावी बनाती है। आधुनिक रेल सिस्टम से इसमें विभिन्न दृष्टि यंत्र और सहायक उपकरण भी आसानी से लगाए जा सकते हैं, जिससे सटीकता और मारक क्षमता दोनों में वृद्धि होती है।

2019 में शुरू हुए भारत-रूस संयुक्त उद्यम के तहत अब तक आयातित असेंबली पर निर्भरता थी। अब हर हिस्सा और सामग्री भारतीय उद्योग से आ रही है। इससे विदेशी निर्भरता समाप्त होकर पूर्ण स्वदेशी उत्पादन का दौर शुरू हो गया है। प्रारंभिक परीक्षणों के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। सितंबर 2026 में और प्रोटोटाइप सेना के विस्तृत परीक्षणों के लिए भेजे जाएंगे। लक्ष्य है 6 लाख राइफलों की आपूर्ति में तेजी लाना और उत्पादन दर को हर 100 सेकंड में एक राइफल तक पहुंचाना।

रणनीतिक दृष्टि से यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक युद्ध में सैनिक की व्यक्तिगत मारक क्षमता और विश्वसनीयता निर्णायक भूमिका निभाती है। स्वदेशी राइफल न केवल आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाती है, बल्कि युद्धकालीन जरूरतों के अनुसार तेजी से उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी देती है। साथ ही, यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को रक्षा क्षेत्र में मजबूती प्रदान करता है।

‘शेर’ नाम ही इस राइफल की ताकत और भारतीय सशस्त्र बलों की गरिमा का प्रतीक है। अब जरूरत है कि उत्पादन क्षमता को समयबद्ध तरीके से बढ़ाया जाए और गुणवत्ता मानकों को निरंतर उच्च रखा जाए। यह कदम न केवल सेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की छवि को भी मजबूत करेगा। रक्षा क्षेत्र में ऐसी स्वदेशी सफलताएं ही भविष्य की सुरक्षा की असली गारंटी हैं।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families