जोधपुर के आकाश में इस बार अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नई उड़ान भरी जा रही है। जापान के आठवें एयर विंग के तीन मित्सुबिशी एफ-2 लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना स्टेशन जोधपुर पहुँच चुके हैं। ये विमान 9 से 22 सितंबर तक चलने वाले 14 दिवसीय द्विपक्षीय वायु अभ्यास ‘वीयर गार्डियन-2026’ में भाग लेंगे। भारतीय वायुसेना अपनी ओर से तेजस, सु-30एमकेआई और राफेल विमानों को मैदान में उतार रही है।
यह अभ्यास मात्र साझा युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा साझेदारी को मजबूत करने का रणनीतिक कदम है। दोनों वायुसेनाएँ संयुक्त युक्तियों, हवाई युद्ध प्रशिक्षण तथा इंजीनियरिंग व सुरक्षा मानकों पर विशेषज्ञ आदान-प्रदान करेंगी। 2023 में जापान में हुए पिछले संस्करण की सफलता के बाद यह अभ्यास द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई दे रहा है।
एफ-2 विमानों का जोधपुर आगमन भारतीय वायुसेना की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और जापान के साथ गहरी होती अंतर-संचालन क्षमता का प्रमाण है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जिससे सामरिक समझ और तकनीकी सामंजस्य और मजबूत होगा। आज के जटिल सुरक्षा परिदृश्य में ऐसे अभ्यास न केवल कौशल निखारते हैं, बल्कि आपसी विश्वास और सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता का आधार भी तैयार करते हैं।
भारत और जापान की यह साझेदारी हिंद-प्रशांत में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। जोधपुर के आसमान में गूंजने वाली इन उड़ानों से साफ है कि दोनों देशों की रक्षा साझेदारी अब नई ऊँचाइयों को छू रही है।
यह सिर्फ एक सैन्य एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि उस जापान की जबरदस्त सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी है, जिसने टेक्नोलॉजी में सर्वश्रेष्ठ होने के बावजूद द्वितीय विश्वयुद्ध में हुए भयंकर नुक्सान के बाद सैन्य शक्ति के बारे में सोचना बंद कर दिया था। अब जापान को इस बात का एहसास हो गया है कि अस्त्र-शस्त्र युद्ध के लिए नहीं बल्कि शान्ति के लिए अधिक जरुरी होते हैं।


