20 सितंबर को भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलीश फिलीपींस के सुबिक बे पहुंचे। यह आगमन आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (एडीएमएम-प्लस) की संयुक्त सहयोग गतिविधि में भाग लेने के लिए हुआ। शिवालिक श्रेणी का मल्टी रोल गुप्त फ्रिगेट और कोरा श्रेणी का मिसाइल कॉर्वेट इस बहुपक्षीय अभियान का हिस्सा हैं। इसमें आसियान देशों के साथ जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई और अमेरिका जैसी भागीदार शक्तियां शामिल हैं।
यह तैनाती भारत की एक्ट ईस्ट नीति और महासागर दृष्टि का जीवंत प्रमाण है। यह दृष्टि क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए समग्र सहयोग पर जोर देती है। एडीएमएम-प्लस के इस मंच पर आपदा प्रतिक्रिया, इंटर- ऑपेराबिलिटी क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास और समुद्री सुरक्षा पर विशेषज्ञ आदान-प्रदान हो रहे हैं। यह भारत की क्षेत्रीय भागीदारों के साथ रचनात्मक संलग्नता की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
भारत-फिलीपींस संबंधों की नींव 1949 में राजनयिक संबंधों और 1952 की मित्रता संधि से पड़ी। 2006 के रक्षा सहयोग समझौते ने संस्थागत रूप दिया। हाल के वर्षों में यह तेजी से गहरा हुआ। अगस्त 2025 में दोनों देशों ने सामरिक साझेदारी घोषित की। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति और अगस्त 2025 में दक्षिण चीन सागर में पहला संयुक्त नौसैनिक अभ्यास इस साझेदारी के ठोस परिणाम हैं। नियमित पोर्ट कॉल, प्रशिक्षण और समुद्री डोमेन जागरूकता सहयोग ने विश्वास को मजबूत किया है।
सुबिक बे में यह उपस्थिति न केवल द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को आगे बढ़ाती है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था और स्थिरता के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प को भी दर्शाती है। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में ऐसी बहुपक्षीय गतिविधियां साझा चुनौतियों का सामना करने और पारस्परिक समझ बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं।


