भारत और मंगोलिया के बीच सैन्य सहयोग का 18वां संस्करण ‘नोमैडिक एलीफेंट 2026’ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में सफलतापूर्वक चल रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के 45-45 जवान अर्ध-शहरी और पर्वतीय इलाकों में संयुक्त आतंकवाद-विरोधी अभियानों का अभ्यास कर रहे हैं। सामरिक ड्रिल, संयुक्त परिचालन योजना और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के जरिए यह अभ्यास अंतर-संचालन क्षमता, परिचालन समन्वय और आपसी समझ को मजबूत करने पर केंद्रित है।
यह सैन्य अभ्यास केवल वर्तमान सुरक्षा जरूरतों तक सीमित नहीं। यह भारत और मंगोलिया के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का विस्तार है। बौद्ध धर्म के माध्यम से दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक बंधन हजारों वर्ष पुराने हैं। मंगोलिया में बौद्ध धर्म के प्रसार में भारतीय बौद्ध भिक्षुओं की भूमिका निर्णायक रही। आज भी मंगोलिया भारत को अपना आध्यात्मिक पड़ोसी मानता है।
2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक मंगोलिया यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाई दी। उस दौरान मंगोलियाई प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘कंथक’ नाम का घोड़ा उपहार में दिया था, जो दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक बन गया। यह यात्रा केवल राजनयिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की भी थी।
‘नोमैडिक एलीफेंट’ जैसे अभ्यास भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और विस्तारित पड़ोस नीति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। मंगोलिया मध्य एशिया में भारत का विश्वसनीय साझेदार है। दोनों सेनाओं का यह संयुक्त प्रयास न केवल द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करता है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भागीदारी के लिए भी तैयार करता है।
प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक सैन्य साझेदारी में बदलना भारत की सामरिक दूरदर्शिता का प्रमाण है। पिथौरागढ़ की पहाड़ियों में चल रहा यह अभ्यास यही संदेश देता है कि भारत और मंगोलिया की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरती जा रही है।


