राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 अक्टूबर को राष्ट्रीय सुरक्षा लिहाज से महत्वपूर्ण मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच बनी रोहतांग स्थित अटल टनल का निरीक्षण कर इसे विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग चमत्कार बताया। सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित यह 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग समुद्र तल से 10000 फीट से अधिक ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी सुरंग है। यह मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच वर्षभर संपर्क सुनिश्चित करती है तथा यात्रा समय चार-पांच घंटे कम करती है।
राष्ट्रपति ने वहां लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया, आगंतुक पंजी पर हस्ताक्षर किए और स्थानीय महिला नेताओं ने उनका स्वागत किया। सुरंग दूरदराज के क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़कर पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। तथापि यहाँ हम आपको बता दें कि इस टनल की वास्तविक महत्ता पर्यटन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में निहित है।
पूर्व में शीतकाल में रोहतांग दर्रा बर्फ से बंद हो जाता था, जिससे सीमावर्ती चौकियों तक पहुंचना अत्यंत कठिन या असंभव हो जाता था। सैनिकों की रसद, गोला-बारूद और चिकित्सा सहायता बाधित रहती थी। अटल टनल के संचालन से अब ये चौकियां हर मौसम में सुलभ हैं। यह भारत की उत्तरी सीमाओं पर रणनीतिक गतिशीलता को मजबूत करती है तथा चीन सीमा पर सतर्कता बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
बॉर्डर रोड्स आर्गेनाईजेशन (BRO) यानि सीमा सड़क संगठन की यह उपलब्धि न केवल तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि भारत की संकल्पशक्ति का भी प्रतीक है। अटल टनल दूरस्थ समुदायों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ राष्ट्र की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है। यह परियोजना सिद्ध करती है कि बुनियादी ढांचा सुरक्षा का आधार स्तंभ है।


