भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने विशिष्ट कॅरियर के अंतिम अध्याय में एक यादगार क्षण रचा। जोधपुर एयरबेस पर बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति-26 के दौरान स्वदेशी तेजस विमान के नियंत्रण में उन्होंने अपना अंतिम फाइटर सॉर्टी भरा। मित्र देशों के विमानों और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के साथ उड़ान भरते हुए उन्होंने उस परंपरा को जीवंत किया जिसमें कमांडर स्वयं आगे बढ़कर मिसाल पेश करता है।
31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले एयर चीफ मार्शल सिंह का यह कदम केवल औपचारिकता नहीं था। यह उस जुनून का प्रमाण है जो उम्र की सीमाओं को पार कर जाता है। फाइटर पायलट का स्वभाव कभी नहीं बदलता, “One a Fighter Pilot, Always a Fighter Pilot”। एयर चीफ मार्शल सिंह की नेतृत्व शैली में साहस, स्पष्टवादिता और राष्ट्रहित की प्राथमिकता सदैव प्रमुख रही। चाहे ऑपरेशन सिंदूर हो या अन्य रणनीतिक चुनौतियाँ, उन्होंने मुद्दों पर निर्भीक रुख अपनाया और भारत की सैन्य क्षमता तथा संकल्प को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
तरंग शक्ति में तेजस की यह उड़ान स्वदेशी विमानन क्षमता के बढ़ते विश्वास को भी रेखांकित करती है। अभ्यास में आठ वायुसेनाओं और दर्जनों पर्यवेक्षक देशों की भागीदारी ने भारत की साझेदारी और अंतर-संचालन क्षमता को मजबूती दी। एयर चीफ मार्शल का तेजस चुनना आत्मनिर्भरता के संदेश को और गहरा बनाता है।
व्यक्तिगत रूप से उनकी जीवनशैली भी प्रेरणादायी रही। मैराथन के बाद अपने कनिष्ठ अधिकारियों के साथ किसी फ़िल्मी धुन पर थिरकते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ और उसे करोड़ों लोगों ने न सिर्फ देखा बल्कि उसकी सराहना भी की। यह उनके जिंदादिल और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक है। उड़ान का अध्याय समाप्त हो रहा है, पर राष्ट्रसेवा का मिशन जारी रहेगा। ऐसे नेतृत्वकर्ता वायुसेना और राष्ट्र दोनों के लिए गौरव हैं।


