भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा भारतीय सेना के सभी रैंकों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर (ईएमई) के सभी अधिकारियों, जवानों, वेटरन्स और परिवारों को कोर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। 15 अक्टूबर को मनाया जाने वाला यह दिवस कोर की गौरवशाली यात्रा का स्मरण कराता है।
1943 में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारतीय इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (आईईएमई) के रूप में स्थापित यह कोर 15 अक्टूबर को आर्मी ऑर्डनेंस कोर से कर्मियों के स्थानांतरण के साथ अस्तित्व में आया। स्वतंत्रता के बाद यह इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स बना। 1980-90 के दशक में सेना के आधुनिकीकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते उपयोग ने 1 जनवरी 2001 को इसका नाम बदलकर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स कर दिया। यह बदलाव समय की माँग था।
ईएमई कोर भारतीय सेना के समस्त उपकरणों, छोटे हथियारों से लेकर मुख्य युद्धक टैंक, मिसाइल सिस्टम और विमानन उपकरण तक, के रखरखाव, मरम्मत और पुनरुत्थान का जिम्मा संभालता है। युद्ध और शांति दोनों में यह युद्धक क्षमता का बल गुणक साबित होता है। देशभर में फैले ईएमई कार्यशालाएँ अब क्षमता और जिम्मेदारियों के आधार पर स्टैटिक वर्कशॉप के रूप में उन्नत हुई हैं। महू छावनी की वर्कशॉप इसका उदाहरण है।
ईएमई कोर आज सिर्फ हथियारों और सैन्य उपकरणों की देखभाल ही नहीं कर रही है, बल्कि एडवांस्ड रोबोटिक्स, कम्प्यूटर्स व अन्य आईटी उपकरणों की देखभाल और रखरखाव भी बखूबी कर रही है।
‘कर्म ही धर्म’ के आदर्श वाक्य के साथ यह कोर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। उच्च प्रौद्योगिकी युग में ईएमई की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। कोर दिवस पर हम इन प्रौद्योगिकीय योद्धाओं को सलाम करते हैं, जो सेना को सदैव युद्ध के लिए तैयार रखते हैं।


