बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने अपने शेषनाग-150 लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए रॉकेट-असिस्टेड टेकऑफ (RATO) का सफल परीक्षण कर भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। कंपनी की ग्रिफॉनवर्क्स टीम द्वारा संपन्न इस परीक्षण ने गहन-आघात ड्रोन के लिए भारत का प्रथम रनवे-मुक्त प्रक्षेपण क्षमता प्रदर्शित की है।
150 किलोग्राम वर्ग का यह सिस्टम 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। पाँच घंटे से अधिक की इनडूरेंस और 25 से 40 किलोग्राम के वॉरहेड के साथ यह प्लेटफॉर्म शत्रु की गहराई में सटीक आघात कर सकता है। इससे पूर्व अप्रैल 2026 में पोखरण में हुए परीक्षण में इसने 720 किलोमीटर की उड़ान पूरी की थी। रॉकेट-असिस्टेड टेकऑफ से अब यह ड्रोन बिना तैयार रनवे के भी कठिन और अग्रिम क्षेत्रों से प्रक्षेपित किया जा सकेगा, जिससे स्वार्म ऑपरेशनों की संभावनाएँ कई गुना बढ़ गई हैं।
यह विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में निर्णायक कदम है। सेना, वायुसेना और नौसेना तीनों सेवाओं के लिए उपलब्ध होने वाला यह प्लेटफॉर्म कम लागत पर उच्च प्रभाव वाले गहन-आघात अभियानों को संभव बनाएगा। कंपनी अधिकारियों ने इसे भारतीय गहन-आघात क्षमताओं का नया अध्याय बताया है।
आज के ही दिन भारत राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के ब्लैक कैट कमांडो का 42वाँ स्थापना दिवस भी मना रहा है। आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अद्वितीय योगदान देने वाले ये जवान राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के प्रहरी बने हुए हैं।
शेषनाग-150 जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म और एनएसजी जैसी विशिष्ट इकाइयाँ मिलकर भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं। यह न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को भी रेखांकित करता है।


