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इंदौर में फिर हुई मानवता शर्मसार पार्थिव शरीर से जेवर हुए गायब

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इंदौर शहर जहाँ पुरे देश में शांति और स्वच्छ्ता में अपनी अलग ही पहचान रखता है वही कुछ दरिंदे लोगों के कारण इसके नाम पर कालिख भी लग जाती है | पोस्टमार्टम रूम में जन्मदिन मनाने की घटना हो या हॉस्पिटल से जीवनरक्षक इंजेक्शन को ब्लैक में बेचने का मामला हो| ऐसा ही एमटीएच अस्पताल में महिला के शव से जेवर चोरी होने का मामला सामने आया है । जेवर चोरी होने पर जब परिजनों ने हंगामा किया तो आधे घंटे बाद अस्पताल वालों ने यह कह कर जेवर दे दिए कि वह तो कहीं कोने में पड़े थे । इतना ही नहीं उसके शव को एमवाय अस्पताल से मुक्तिधाम तक फ्री में पहुंचा दिया । वहीं बेटे का आरोप है कि उसकी मां के इलाज के लिए डॉक्टर ने 5000 में इंजेक्शन सप्लाई करने की बात भी कही थी । इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन में की तो उन्हें स्टाफ ने धमकाया भी था ।
सुखलिया में रहने वाले दीपेश वर्मा ने बताया कि उसकी मां अनीता की इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह एमटीएच अस्पताल में मौत हो गई । तीन दिन पहले मां को सिर्फ सांस लेने में दिक्कत थी लेकिन कोविड के लक्षण नहीं थे । एक जगह जांच कराई तो उन्होंने कहा एमटीएच अस्पताल ले जाओ । वहां पर बगैर किसी जांच के भर्ती कर लिया गया । मां कल दिन तक ठीक थी लेकिन रात को उनकी हालत खराब होने लगी ।
दो दिन पहले एक डॉक्टर ने मां को रेमडीसीवर इंजेक्शन लगने की बात कही , जिसकी कीमत 5 हजार रुपए बताई । दीपेश ने बोला कि यह इंजेक्शन फ्री में लगते हैं तो वह पैसे नहीं देगा । दीपेश की बहन ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत कर दी । इसके बाद स्टाफ और डाक्टरों ने उसे धमकाते हुए शिकायत वापस लेने की बात कही । धमकाकर शिकायत वापस करवाई और अगले दिन 12:30 बजे बोले फिर इंजेक्शन चाहिए । परिवार ने फिर एक इंजेक्शन की व्यवस्था कर दी ।

गुरुवार रात 12:00 बजे मां ने फोन लगाकर कहा कि उसकी हालत बहुत खराब है । यहां कोई इलाज नहीं हो रहा है । उसे निकलवा लो वरना वह मर जाएगी । तब भी डॉक्टर ने कुछ नहीं कहा ।
 सुबह 6:00 बजे उसे बताया गया कि मां की तबीयत खराब थी और वह मर चुकी है । 7:00 बजे दीपेश और उसका परिवार मां का शव लेने एमटीएच पहुंचा तो वहां सामान दे दिया । जिसमें फोन भी था , लेकिन जेवर नहीं थे । इस पर उन्होंने आपत्ति ली तो स्टाफ ने कहा कि पेशेंट तो जेवर लाया ही नहीं था । वैसे भी शव एमवायएच भेज दिया है इसलिए जेवर का पता नहीं । इस पर गुस्साए परिजन बोले हम शव नहीं ले जाएंगे और घर पहुंच गए । आधा घंटे बाद एमटीएच अस्पताल से फोन आया कि उनके जेवर मिल गए हैं । कोने में पड़े थे । तत्काल उन्हें जेवर दे दिए और साथ ही एमवायएच से मुक्तिधाम तक उनको निशुल्क एंबुलेंस की व्यवस्था करवाई ।

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