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शिवसेना के एक नाथ : उद्धव ठाकरे के ऑफर पर बागी शिंदे का भी आया बयान,  NCP और कांग्रेस का साथ छोड़ें

महाराष्ट्र में सिंधि ..या – 2

महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच आज सीएम उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर बागी विधायक उनसे यह कहते हैं कि वह उन्हें (ठाकरे) मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते तो वह अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं. ठाकरे ने कहा, “सूरत और अन्य जगहों से बयान क्यों दे रहे हैं? मेरे सामने आकर मुझसे कह दें कि मैं मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष के पदों को संभालने में सक्षम नहीं हूं. मैं तत्काल इस्तीफा दे दूंगा. मैं अपना इस्तीफा तैयार रखूंगा और आप आकर उसे राजभवन ले जा सकते हैं.”
उनके इस बयान के कुछ देर बाद ही एकनाथ शिंदे ने अपना रुख साफ कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि शिवसेना को एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ना होगा. उन्होंने चार पाइंटर्स में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि-

पिछले ढाई वर्षों में, एमवीए सरकार ने केवल घटक दलों को फायदा पहुंचाया, और शिवसैनिकों को भारी नुकसान हुआ.
घटक दल मजबूत हो रहे हैं, शिवसेना का व्यवस्थित रूप से गबन किया जा रहा है.
पार्टी और शिवसैनिकों के अस्तित्व के लिए अस्वाभाविक मोर्चे से बाहर निकलना जरूरी है.
महाराष्ट्र के हित में अब निर्णय लेने की जरूरत है.

शरद पवार ने कहा- एकनाथ शिंदे को सीएम बना दो

बता दें कि, राज्य में जारी इस सियासी घमासान के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात भी की है. सूत्रों के अनुसार बैठक में शरद पवार ने सलाह दी है कि अगर विद्रोह को कम करना है तो एकनाथ शिंदे को सीएम बनाने का निर्णय ले लेना चाहिए. इसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने भी कहा कि उन्हें शिंदे को समर्थन करने में दिक्कत नहीं है बाकि उद्धव ठाकरे जो भी फैसला लेंगे वो मंजूर है.

शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने की है बगावत

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की सरकार है. वहीं इसी बीच दो दिन पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी. शिंदे शिवसेना के करीब 40 विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में हैं और खुद को असली शिवसेना बता रहे हैं. उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे के सामने बीजेपी के साथ सरकार बनाने की शर्त रखी है.

गुवाहाटी के होटल रेडिसन में बैठे एकनाथ शिंदे के सरकार और पूरी शिवसेना पर दावा ठोंकने के महज डेढ़ घंटे बाद मुंबई के सीएम हाउस मैं बैठे उद्धव ने फेसबुक लाइव किया। कहने को वे लोगों से बातें कर रहे थे, लेकिन सारी बातें शिंदे के नाम थीं।

उद्धव ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष समेत सभी पद छोड़ने को तैयार हूं। बस नाराज विधायकों की जो भी मांगें हैं, वो सामने आकर तो कहते। ये FB लाइव करीबन 18 मिनट का था। अहम बातें ये रहीं…

“कुछ दिन पहले सर्जरी होने के कारण लोगों से मिल नही पाया, लेकिन इस वजह से कोई काम रुके नहीं। हिंदुत्व के लिए किसने क्या किया, यह बोलने की जरूरत नहीं, विधानसभा में हिंदुत्व पर बोलनेवाला मैं पहला मुख्यमंत्री था।
बालासाहब की शिवसेना और अब की शिवसेना में कोई फर्क नहीं, उन्हीं के विचार लेकर चल रहा हूं, आज भी हूं, पहले भी था और आगे भी हिंदू रहूंगा।

पिछले ढाई साल से मुख्यमंत्री हूं, तब से मेरे साथ बालासाहब की शिवसेना के हिंदू भी थे। उन्हें जो मिला, वो बालासाहब के बाद वाली शिवसेना ने ही उन्हें दिया ये याद रखें।

मेरा पास कोई अनुभव नहीं था, अलग रास्ता भी अपनाना पड़ा, जो भी हुआ.. वो सब को पता है। पवार साहब और तीन दलों की बैठक में पवार साहब ने कहा था, जिम्मेदारी आपको लेनी होगी। आप नहीं होंगे तो शिवसेना साथ नहीं चल पाएगी। कांग्रेस-राकांपा और शिवसेना को एकसाथ काम करना होगा तो आप ही नेतृत्व संभालें। पवार के कहने पर ही मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी ली। सोनिया भी फोन करती हैं। इसके पीछे मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। इन सभी ने मुझे मदद की है।

इसमें मेरा स्वार्थ नहीं था। अलग रास्ता लेने के बाद भी उसका कुछ अर्थ होना चाहिए। सभी ने अनुभव ना होते हुए भी मुझे संभाला। लेकिन मेरे ही लोगों को अगर मेरा मुख्यमंत्री होने पसंद नहीं तो वो यहां आकर भी बोल सकते थे। सूरत में जाकर बोलने की क्या जरूरत थी।

मुख्यमंत्री पद छोड़ कर, वर्षा बंगला छोड़कर मैं मातोश्री जाने के लिए तैयार हूं। मुझे सत्ता का मोह नहीं। मेरे पास आकर ये बात रखनी चाहिए थी।

2014 का चुनाव हमने अपने दम पर और हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा था। हमने उस वक्त भी कठिन परिस्थियों में चुनाव लड़ा था। इस बात का ध्यान रहे कि 2014 के बाद जो लोग बोल रहे हैं कि शिवसेना बाला साहेब ठाकरे वाली नहीं रही। वो लोग ध्यान रखें कि नई शिवसेना से ही हमें मंत्री पद मिले।

अभी विधानपरिषद का चुनाव हुआ। इसके बाद सभी विधायक एक होटल में थे। मैं वहां गया। वहां पर भी मैंने कहा था कि शिवसैनिक मेहनत करते हैं, जनता भरोसा करती है, लेकिन हमारे लोगों को साथ में रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।

मुझे कुर्सी पर बैठने का मोह नहीं है। मैं जबरदस्ती इस कुर्सी पर नहीं बैठना चाहता। मगर जो कुछ भी कहना है, वो सामने आकर कहें। एक तरफ ये कहना कि मैं शिवसैनिक हूं और फिर ऐसा काम करना है। कहावत है कि कुल्हाड़ी में लकड़ी का हत्था लगा होता है और वही पेड़ काटता है। पार्टी से गद्दारी ठीक नहीं है।

शिंदे मुझसे बोलते तो मैं इस्तीफा दे देता। अगर आप चाहते हैं कि मैं सीएम की कुर्सी पर न रहूं तो बोलें। विधायक अगर मुझसे बोलते हैं तो मैं कुर्सी छोड़ दूंगा। जब तक शिवसैनिक मेरे साथ हैं मैं हर चुनौती का सामना करूंगा। जो कहते हैं कि मैं शिवसेना का नेतृत्व करने के लायक नहीं हूं तो मैं उन्हें तवज्जो नहीं देता।

मैं संकटों से जूझने वाला शिवसैनिक हूं। शिवसैनिक बोलें कि मैं पद छोड़ूं तो मैं छोड़ दूंगा। उद्धव ठाकरे नहीं चाहिए तो भी सही है, पर मेरे सामने आकर ये बात करो।

आप फेसबुक लाइव देख रहे हैं तो मुझे बताएं कि आप मुझे सीएम पद पर देखना नहीं चाहते। आप सामने आकर बात करें और मुझसे ये बात करें तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं। अगर सामने नहीं आ सकते तो फोन पर बात कर लीजिए।”

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