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राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया ओबीसी का डाटा, जल्द हो सकता है फैसला, 16 अगस्त को होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश पर ओबीसी का डाटा पेश कर दिया है। इस रिकॉर्ड के आधार पर  आगे दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने जनसंख्या का डाटा प्रस्तुत किया था। जिसके बाद शिवराज सरकार ने प्रतिनिधित्व का डेटा पेश किया।

उक्त डेटा में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 3,21,944 में से ओबीसी वर्ग को मात्र 43,978 पद अर्थात 13.66% आरक्षित बताया गया है। यह डेटा हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अभी पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाना शेष है।

लेकिन कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों को लेकर ओबीसी संयुक्त मोर्चा ने आपत्ति जताई है। पदाधिकारी ने  कहा कि सरकार ने  कर्मचारियों की संख्या गलत बताई गई हैं। रिपोर्ट में निगम मंडल, निकाय कर्मचारियों को नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने मांग की है कि नए सिरे से ओबीसी कर्मचारियों की गणना हो।

जानकारी के अनुसार एमपी में 1994 से पहली बार ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। लेकिन तत्कालीन कमलनाथ ने कांग्रेस सरकार में इसे 27 प्रतिशत कर दिया था। और बाद में हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगाई गई। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण से संबंधित कई मामले विचाराधीन हैं। साथ ही 16 अगस्त 2022 को फाइनल सुनवाई के लिए नियत की गई है।

बता दें कि 1 अगस्त 2022 को प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह की युगलपीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए निर्धारित था। लेकिन 3:30 बजे से हाईकोर्ट में अवकाश हो गया और इस वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। 3:15 बजे ओबीसी वर्ग की ओर से इस बात पर जोर दिया गया था कि 2 अगस्त को सुनवाई रखी जाए। लेकिन हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की सहमति से आगामी सुनवाई 16 अगस्त को किए जाने का निर्णय सुना दिया।

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