इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) के 118 वर्षीय गौरवशाली इतिहास में 14 जून, 2026 का दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 158वीं नियमित कोर्स और 141वीं तकनीकी स्नातक कोर्स के 515 कैडेट्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते हुए नौ महिला कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया। ये नौ बहादुर महिलाएं आईएमए की 94 वर्षीय परंपरा में पहली बार स्थायी कमीशन प्राप्त करने वाली सैन्य अधिकारी बनकर उभरी हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे मात्र एक सैन्य आयोजन नहीं, बल्कि भारत की रक्षा व्यवस्था और महिला-सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक गर्वित करने वाला पल बताया। ये महिला कैडेट्स नेशनल डिफेन्स एकेडमी (एनडीए) से प्रशिक्षण प्राप्त कर 2025 में आईएमए पहुंची थीं। पूर्व में महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन तक सीमित रखने की नीति से अब स्थायी कमीशन की ओर यह स्पष्ट संक्रमण रक्षा बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, “सेना अधिकारी के रूप में इन कैडेट्स की जिम्मेदारी सैनिकों का नेतृत्व, मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना होगी।” उन्होंने जोर दिया कि साहस और बुद्धिमत्ता ही इन युवा अधिकारियों की सबसे बड़ी पूंजी होगी। विशेष रूप से नौ महिला कैडेट्स की उपस्थिति को उन्होंने “भारत की महिला-नेतृत्व विकास यात्रा” का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
इस परेड में 34 विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी ने वैश्विक सहयोग का संदेश भी दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत की विश्व मंच पर मित्रता, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंधों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह घटनाक्रम सिर्फ संख्या या प्रतीक नहीं है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में तकनीकी, साइबर और बहुआयामी चुनौतियों के बीच विविधता भरी सेना की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। महिलाओं को स्थायी कमीशन देकर भारत ने न केवल अपनी सशस्त्र सेनाओं को मजबूत किया है, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दिया है कि राष्ट्र की रक्षा में कोई लिंग-भेद नहीं।
‘रक्षा सम्वाद’ के माध्यम से पाठकों को हम यह बताना चाहते हैं कि आईएमए की इस उपलब्धि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका ‘नारी शक्ति वंदन’ को सैन्य क्षेत्र में साकार कर रही है। यह नई भारत की कहानी है- आत्मनिर्भर, समावेशी और अजेय।


