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Ujjain News – उज्जैन नागदा : फैक्ट्री में गैस लीक हुई, बड़ा हादसा होने से टला

उज्जैन के नागदा स्थित ग्रेसिम फैक्ट्री में एसिड प्लांट में बुधवार को ब्लास्ट हो गया। इससे गैस का तेजी से रिसाव होने लगा। 45 मिनट तक पूरे शहर की सांसें अटकी रही। एसिड प्लांट में इवेपोरेटर का मेंटनेंस किया जा रहा था। इस दौरान वॉल्व फट गया।

फैक्ट्री में गैस रिसाव से भगदड़ मच गई। एसिड प्लांट नंबर-1 में शाम करीब 4 बजे ओलियम इवेपोरेटर के मेंटनेंस के दौरान वॉल्व फट गया। इसका मेंटनेंस शनिवार से किया जा रहा था। बुधवार को ड्रेन वॉल्व की सफाई की जा रही थी। इसे बाद इसे नियंत्रित कर लिया गया। गैस के रिसाव से लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई।

बादलों की तरह फैल जाती है सल्फर ट्राय ऑक्साइड

नागदा एसडीएम आशुतोष गोस्वामी ने बताया कि सल्फर ट्राय ऑक्साइड गैस बादलों की तरह फैल जाती है। इस वजह से इसे कंट्रोल करने में 45 मिनट का वक्त लग गया। वॉल्व दो इंच का होने से अधिक प्रेशर से गैस का रिसाव हुआ। गैस निकलते देख फैक्ट्री और शहर में हड़कंप मच गया। शहर में लोग घरों में दुबक गए। जो लोग बाहर थे, वो मास्क और मुंह पर कपड़ा बांधकर निकले। फैक्ट्री प्रबंधन की बड़ी खामियां इसमें उजागर हुई है। इसकी सूचना भी जिला उद्योग अधिकारी को दे दी गई है।

मजदूरों व अन्य कर्मचारियों से यूनिट को खाली करा लिया गया। यह गैस धुआं बनकर शहर के कई क्षेत्रों में प्रवेश कर गई। मामले की जांच के लिए उज्जैन से अधिकारियों का दल नागदा के लिए रवाना हो गया। अभी तक किसी की जान जाने या हादसे की सूचना नहीं है।

गैस हानिकारक नहीं, अस्पताल को किया अलर्ट

ग्रेसिम उद्योग जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास ने बताया कि फैक्ट्री में दोपहर 3 बजे सल्फर ट्राई ऑक्ससाइड गैस का रिसाव हुआ है। फिलहाल, कारणों का पता नहीं लग पाया है। घटना की सूचना पर उद्योग के जनसेवा अस्पताल को अलर्ट कर दिया गया है। गैस हानिकारक नहीं है। इसका असर चंद मिनटों के लिए रहता है। इस गैस की वजह से कोई बीमार नहीं हुआ है। कोई कैजुअल्टी भी नहीं हुई है।

फाइबर की गुणवत्ता बढ़ाती है सल्फर ट्राइ ऑक्साइड

सल्फर ट्राइ आक्साइड का इस्तेमाल केमिकल रिएक्शन में किया जाता है। इसे अन्य गैसों के साथ मिलाकर उद्योगों में बनने वाली फायबर की गुणवत्ता (चिकनाई) बढ़ाई जाती है। यह गैस काफी ज्वलनशील होती है।

रात में होता हादसा तो होते गंभीर परिणाम

कम तापमान में यह गैस ज्यादा ऊपर तक नहीं जाती है। यही हादसा दिन की जगह रात में हुआ होता तो गैस ज्यादा ऊंचाई पर न जाकर कम तापमान में धुएं की तरह नीचे ही फैलती जाती। इससे रात में गंभीर हादसा हो सकता था। जानकार बताते हैं कि दिन में तापमान अधिक होने के कारण यह गैस ऊपर तक जाकर फैल गई। इस वजह से बड़े हिस्से में गैस नहीं फैल सकी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इतनी खतरनाक गैस रिसाव होने की स्थिति के बावजूद उद्योग की ओर से आपातकालीन सायरन नहीं बजाया गया।

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