वार्ड आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में बहस पूरी, आदेश सुरक्षित

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sadbhawnapaati
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अवमानना याचिका पर 14 जून को सुनवाई
इंदौर। वार्ड आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका में गुरुवार को मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया। इसके जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नगरीय निकाय के निर्वाचन के लिए किया गया वार्ड आरक्षण यथावत रहेगा या इसमें परिवर्तन होगा।
उच्च न्यायालय में यह याचिका जयेश गुरनानी ने दायर की है। इसमें कहा है कि 25 मई 2022 को नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव के हस्ताक्षर से एक अधिसूचना जारी हुई थी। इसके पालन में जिला कलेक्टरों ने रोटेशन पद्धति का पालन किए बगैर जो वार्ड पूर्व में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे, उन्हें उन्हीं वर्ग के लिए आरक्षित रखा और वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कर ली। रोटेशन पद्धति का पालन नहीं होने की वजह से वार्डों में रहने वाले अन्य वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व करने का मौका ही नहीं मिल पाया।
वार्ड आरक्षण निरस्त करने की मांग - याचिका में मांग की गई है कि 25 मई को जारी अधिसूचना के पालन में जिला कलेक्टरों द्वारा किए गए वार्ड आरक्षण को निरस्त किया जाए। याचिकाकर्ता गुरनानी ने बताया कि हमने न्यायालय से अंतरिम राहत मांगते हुए वार्ड आरक्षण के संबंध में जारी आदेशों पर स्थगन मांगा है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने गुरुवार को याचिकाकर्ता और शासन का पक्ष सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
अवमानना याचिका पर सुनवाई 14 को - वार्ड आरक्षण के संबंध में एक अवमानना याचिका पहले से उच्च न्यायालय में चल रही है। न्यायालय ने इसमें शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका में 14 जून को सुनवाई होनी है।
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