गुड़ी पड़वा पर नवसंवत्सर का आगाज़ : गुरु बने राजा, मंगल संभालेंगे मंत्री पद

नववर्ष शुभ कार्य में गुरु गृह की कृपा

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sadbhawnapaati
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ज्योतिषाचार्य, श्री विनोद जैन (प्रभु)

19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा के साथ विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ होगा। इस वर्ष का नाम “रौद्र (क्रोधी) संवत्सर” रहेगा। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार यह वर्ष विश्व और भारत दोनों के लिए कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लेकर आने वाला माना जा रहा है। ग्रह स्थितियों से संकेत मिलते हैं कि विश्व के अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के बीच विचारों में मतभेद और तनाव की स्थिति बन सकती है। हालांकि विश्व शांति के प्रयासों में भारत तथा अन्य शांतिप्रिय देशों की भूमिका महत्वपूर्ण और सराहनीय रहने की संभावना है।

भारत के संदर्भ में यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक आस्था, यज्ञ, अनुष्ठान, मंदिरों, जिनालयों और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में वृद्धि के संकेत मिलते हैं। देश में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होगा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को भी बल मिल सकता है। समय पर वर्षा होने के योग बनने से अन्न उत्पादन अच्छा रहने की संभावना है, जिससे कृषक वर्ग को लाभ मिलेगा और किसानों की समृद्धि बढ़ेगी। दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि के संकेत हैं तथा देश में सामान्यतः राजनीतिक स्थिरता बनी रहने की संभावना व्यक्त की गई है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में वर्षा और धान उत्पादन मध्यम रह सकता है।

ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार गुड़ी पड़वा के दिन वर्ष भर के लिए ग्रहों की प्रतीकात्मक “सरकार” बनती है। 19 मार्च 2026 से 6 अप्रैल 2027 तक के लिए बने ग्रह मंत्रिमंडल में गुरु ग्रह को राजा अर्थात राष्ट्राध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ है, जबकि मंगल ग्रह मंत्री अर्थात शासनाध्यक्ष के रूप में रहेगा। सस्येश के रूप में भी गुरु ग्रह को ही स्थान मिला है, जबकि धान्येश का पद बुध ग्रह को प्राप्त हुआ है। मेघेश और फलेश के पद चंद्र ग्रह को मिले हैं। रसेश के रूप में शनि ग्रह रहेगा, जबकि नीरसेश और धनेश के पद भी गुरु ग्रह को प्राप्त हुए हैं। दुर्गेश अर्थात सेनानायक का पद भी चंद्र ग्रह को मिला है।

गुड़ी पड़वा पर नवसंवत्सर का आगाज़ : गुरु बने राजा, मंगल संभालेंगे मंत्री पद

इस ग्रह व्यवस्था में दशाधिकारियों के दस पदों में से आठ पद शुभ ग्रहों को प्राप्त हुए हैं। इनमें गुरु ग्रह को चार पद, चंद्र ग्रह को तीन पद और बुध ग्रह को एक पद मिला है। पाप ग्रहों में शनि और मंगल को एक-एक पद प्राप्त हुआ है। गुरु ग्रह के राजा होने से धर्म और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत हैं। देश में धार्मिक आयोजनों का विस्तार होगा, अनुकूल वर्षा के योग बनेंगे और कृषि उत्पादन अच्छा रहने की संभावना है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों का प्रभाव विश्व स्तर पर भी दिखाई दे सकता है।

मंत्री मंगल ग्रह होने के कारण भूमि, संपत्ति, सेना, पुलिस और रक्षा क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। नए रक्षा उपकरणों और तकनीकों के विकास के संकेत हैं। मंगल ग्रह नेतृत्व, साहस और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए शासन और प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में नई दवाइयों और शोध कार्यों में प्रगति होने की संभावना है।

राजनीतिक दृष्टि से वर्ष में कुछ हलचल के संकेत भी मिलते हैं। कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन या मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा और परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। महाराष्ट्र की राजनीति में विशेष हलचल दिखाई दे सकती है। साथ ही कुछ बड़े नेताओं, अभिनेताओं और उद्योगपतियों से जुड़े निजी विवाद या स्कैंडल भी चर्चा में रह सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ग्रह योग कुछ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों की ओर संकेत करते हैं। अमेरिका के लिए यह वर्ष कुछ कठिनाइयों वाला माना जा रहा है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए राजनीतिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण परिस्थितियों के कारण विश्व में असंतुलन का वातावरण बनने की संभावना भी व्यक्त की गई है। ऐसे समय में भारत की कूटनीतिक भूमिका और विश्व शांति के प्रयासों में उसका योगदान महत्वपूर्ण रह सकता है।

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