इंदौर। चमेली देवी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रायोजन से विश्व जल दिवस के अवसर पर “जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में जल के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और पुनः उपयोग (रीयूज) को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया, साथ ही प्राकृतिक उपचार प्रणाली के प्रभावी विकल्पों पर भी विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की एग्जीक्यूटिव सदस्य श्रीमती अनुषा अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट को देखते हुए जल प्रबंधकों और नीति निर्माताओं को वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण देना बेहद आवश्यक हो गया है, ताकि जल संसाधनों का बेहतर और दीर्घकालिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
सेमिनार के मुख्य अतिथि दीपक वी. धमरीकर (सीईओ, जल संरक्षण एवं पुरातत्व के लिए प्राकृतिक संघ, इंदौर) ने अपने संबोधन में कहा कि जल प्रबंधन एक अपेक्षाकृत नई लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है, जिसमें विभिन्न हितधारकों—सरकार, संस्थान और समाज—की संयुक्त भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने जल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जल प्रबंधकों एवं संबंधित हितधारकों की क्षमता वृद्धि पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने जल संरक्षण और सतत जल प्रणाली पर आधारित आकर्षक पोस्टर एवं मॉडल प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मकता और जागरूकता का परिचय दिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जल संरक्षण के व्यावहारिक उपायों को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर डॉ. पंकज कुशवाह द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य अतिथि, वक्ताओं, एमपीसीएसटी, आयोजन समिति, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
सेमिनार में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता रही, जिसने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बना दिया।


