श्री विनोद जैन (प्रभु), ज्योतिषाचार्य, इंदौर
कर्म के दाता, न्याय के अधिपति शनि ग्रह 27 जुलाई 2026 रात्रि 01 बजकर 29 मिनट पर मीन राशि के रेवती नक्षत्र के द्वितीय चरण से वक्र होंगे। यह वक्र गति 11 दिसम्बर 2026 प्रातः 04 बजकर 03 मिनट पर मीन राशि के उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण में समाप्त होकर शनि मार्गी होंगे। इस प्रकार शनि देव कुल 138 दिन तक वक्र अवस्था में रहेंगे।
यह समय केवल भय का नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, कर्म-सुधार और मोक्ष की ओर बढ़ने का दुर्लभ कालखंड है।
मीन में शनि: न्याय के साथ विसर्जन
मीन राशि गुरु की राशि है और कालपुरुष की अंतिम राशि मानी जाती है। इसे मोक्ष और विसर्जन की राशि कहा जाता है। शनि यहां अपने नक्षत्र उत्तराभाद्रपद और बुध के नक्षत्र रेवती में वक्र होकर मनुष्य द्वारा किए गए शुभ और अशुभ कर्मों का पूर्ण लेखा-जोखा करेंगे।
शनि ग्रह को कर्म का न्यायाधीश कहा जाता है। वक्र अवस्था में वे हमारे द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पाप, भूल, अपराध और ऋणों का हिसाब कर उन्हें विसर्जित करेंगे। साथ ही आत्मा और शरीर की शुद्धि का अवसर भी प्रदान करेंगे।
गुरु की नवम दृष्टि: संकट में संजीवनी
इस पूरे समय मीन राशि पर मीन के स्वामी गुरु की नवम दृष्टि बनी रहेगी। गुरु अभी कर्क राशि में शनि के नक्षत्र पुष्य और बुध के नक्षत्र अश्लेषा में विचरण कर रहे हैं। अक्टूबर 2026 में गुरु सिंह राशि के मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
गुरु की शुभ दृष्टि के कारण इस कठिन समय में धर्म, पूजा-पाठ, दान और सेवा से शनि के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकेगा। धर्म के प्रभाव से अशुभ कर्मों का नाश और शुभ कर्मों की वृद्धि शीघ्र होगी।
138 दिन में विश्व, देश और व्यक्ति पर प्रभाव
1. राजनीति और समाज: बड़े-बड़े घोटालों, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का पर्दाफाश होगा। नेता, अधिकारी और व्यापारी वर्ग की साख की परीक्षा होगी। अहंकार और घमंड का विसर्जन होगा।
2. अर्थव्यवस्था और बाजार: विश्व के आर्थिक बाजारों में उथल-पुथल रहेगी। तेल, लोहा, तांबा, सोना-चांदी के बाजारों में तेजी का माहौल रहेगा। एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट और व्यापार में संघर्ष बढ़ेगा। नया निवेश और उधारी से बचें। धनकोष को सुरक्षित रखें।
3. स्वास्थ्य और जनजीवन: जल तत्व के कारण बीमारियां, मानसिक तनाव, क्रोध और विवाद बढ़ सकते हैं। लोगों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।
4. प्रकृति: समुद्र तट, बंदरगाहों पर उथल-पुथल, आंधी, तूफान, भूकंप और अतिवृष्टि के योग बन रहे हैं।
5. अंतरराष्ट्रीय: विश्व के कई देशों के बीच वैचारिक मतभेद और तनाव बढ़ेगा। युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
कर्म का त्रिस्तरीय शुद्धिकरण
शनि देव अपने(90-100) साल का शुद्धि करण
प्रथम 30 वर्ष में व्यक्ति के कर्मों की,
अगले 30 वर्ष में देश-प्रदेश के कर्मों की
और अंतिम 30 वर्ष में पूरे विश्व के कर्मों की शुद्धि करते हैं।
27 जुलाई से 11 दिसम्बर का यह 138 दिन का कालखंड उसी महाशुद्धि यज्ञ का लघु रूप है।
क्या करें, क्या न करें
करें: शनिवार को व्रत, काले तिल, सरसों तेल, लोहा और काले वस्त्र का दान। गरीब, वृद्ध और मजदूरों की सेवा। रोज ॐ शं शनैश्चराय नमः` ॐ हं हनुमते नमः`
गुरु मंत्र का जप
पीले वस्तुओं का दान।
न करें: झूठ, छल, धोखा, किसी का हक मारना। नया बड़ा निवेश और उधारी। रात में अनावश्यक यात्रा। क्रोध और विवाद।
निष्कर्ष
ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु) कहते हैं, “शनि दंड नहीं देते, वे केवल हिसाब करते हैं। मीन राशि में वक्र शनि हमें हमारे कर्मों को सुधारने और नकारात्मक ऊर्जा का विसर्जित करने का अंतिम अवसर दे रहे हैं। 138 दिन तप के हैं, तमाशे के नहीं। जो धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलेगा, गुरु की कृपा से वह हर संकट से पार हो जाएगा।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
जय हो न्यायधीश शनि ग्रह की जय हो सत्य की जीत हो….


