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पत्रकारों पर हमले लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर हमला है: माकपा

भोपाल। प्रदेश भर में पत्रकारों पर हो रहे हमले सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ही हमले नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी कमजोर करने की योजनाबद्ध कोशिश है। जिसे भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह चौहान सरकार लगातार कर रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि चाहे मुरैना में पत्रकारों पर हमला हो या उज्जैन जिले के महिदपुर में एस डी एम की ओर से पत्रकारों के साथ की गई बदतमीजी, इसे पुलिस या प्रशासन की हरकत नहीं माना जा सकता, क्योंकि राजनीतिक संरक्षण के बिना यह सम्भव ही नहीं है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि हाल ही में भिंड जिले में भी एम्बुलेंस के अभाव में एक मरीज को हाथ ठेले पर ले जाने की घटना को उजागर करने पर तीन पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज कर शिवराज सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटकर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को कमजोर कर रही है।
जसविंदर सिंह ने कहा है कि यह प्रशासन इस हद तक असंवेदनशील हो गया है कि अब मरीज के परिवार को ही धमकाया जा रहा है और उससे बयान बदलने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
माकपा ने कहा कि अप्रैल माह में ही सिंगरौली में भाजपा नेता के खिलाफ खबर छापने पर दर्जन भर पत्रकारों को निर्वस्त्र कर पुलिस लॉकअप में रखा गया था।
जसविंदर सिंह ने कहा है कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के प्रहरी ही निशाने पर हैं तो आम नागरिक पर होने वाले दमन को समझा जा सकता है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान सरकार से अपनी दमनकारी नीति बदलने और संघर्षरत पत्रकारों की मांगों को स्वीकार करने की मांग करते हुए पत्रकारों के साथ एकजुटता भी व्यक्त की है।
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