नीच मंगल पर उच्च गुरु की छाया, 31 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी उथल-पुथल
उत्तम शौच : लोभ का त्याग, संतोष का स्वीकार
उत्तम सत्य : वाणी में सत्य, व्यवहार में विश्वास
उत्तम आर्जव : मन, वचन और कर्म को एक कर लेने की साधना
उत्तम मार्दव : मान छोड़ो, आत्मा को हल्का करो
उत्तम क्षमा : क्रोध की अग्नि पर समता का जल
सम्यक् चारित्र : मोक्षमार्ग की सिद्धि, जानने को जीने की कला
सम्यक् ज्ञान : मोक्षमार्ग का प्रकाश, आत्मस्वरूप को जानने की दृष्टि
सम्यक् दर्शन : मोक्षमार्ग की पहली सीढ़ी, आत्मजागरण का द्वार
