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धर्म: पितृपक्ष और शारदीय नवरात्र में मनाया जाता है सांझा सांझी पर्व,


भारत विभिन्नताओं का देश है, जिसमें कई तीज-त्योहार और रीति-रिवाज जुड़े हैं. इन तीज त्योहारों से जुड़ी परंपराएं ही तो है जो भारतवासियों को एक दूजे से जोड़ती हैं. भारतीय संस्कृति से कई पर्व और कई लोकपर्व जुड़े हुए हैं. इन्हीं में एक है सांझा सांझी पर्व. सांझा सांझी पर्व एक महत्वपूर्ण लोक पर्व है जो खासतौर से राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात जैसे प्रदेशों में मनाया जाता है.

मालवा निमाड़ की लोक संस्कृति से जुड़ा ये लोकपर्व पितृपक्ष के 16 दिनों में सांझा पर्व और शारदीय नवरात्र के दिनों में सांझी पर्व के रूप में मनाया जाता है.

सांझा पर्व की तिथि
सांझा पर्व पितृ पक्ष के 16 दिनों में मनाया जाता है. मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में लोग इसे मनाते हैं और संध्या माता की पूजा करते हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या तक सांझा पर्व मनाया जाता है. इस साल पितृपक्ष के साथ ही सांझा पर्व की शुरुआत भी शनिवार 10 सितंबर 2022 को हो चुकी है जोकि रविवार 25 सितंबर 2022 को समाप्त होगी.

सांझी पर्व की तिथि
सांझा पर्व को पितृपक्ष के दिनों में तो सांझी पर्व को शारदीय नवरात्र के दिनों में मनाया जाता है. इसमें कुंवारी कन्याओं द्वारा सांझी माता की पूजा की जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक यह पर्व मनाया जाता है. इस साल सांझी पर्व सोमवार 26 सितंबर 2022 से मंगलवार 04 अक्टूबर 2022 तक मनाया जाएगा.

सांझा सांझी पर्व का महत्व
मान्यता है कि सांझा सांझी पर्व की शुरुआत वैष्णव मंदिरों द्वारा 15 वीं व 16वीं शताब्दी में की गई थी. तब से लेकर आज तक मालवा निमाड़ का यह लोकपर्व गावों में खूब प्रचलित है. धार्मिक मान्यता है कि संजा माता या सांझी माता, मां गौरा का रूप होती हैं. कुंवारी कन्याएं माता गौरा से योग्य वर पाने की मनोकामना करते हुए यह त्योहार मनाती हैं.

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