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प्रदेश में शिक्षकों के 40 हजार से अधिक पद खाली, अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल

-सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई की उम्मीद करना बेमानी
Education News. मध्य प्रदेश में सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रही है। लेकिन में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के नतीजे भले ही घोषित कर दिए गए हों, लेकिन इनसे स्कूलों में खाली प्राथमिक शिक्षकों के पूरे पद नहीं भर पाएंगे। दरअसल, अभी 40 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल शिक्षा विभाग 20 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति तो कर रहा है, पर उससे भी बात बनने वाली नहीं है क्योंकि 40 हजार से अधिक पद फिर भी खाली रह जाएंगे। ऐसे में सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई की उम्मीद करना बेमानी है।
दरअसल इस कैटेगरी के 11 हजार पदों पर ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी जबकि प्रदेश में स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों के करीब 1.25 लाख पद खाली हैं। यह भर्ती भी स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के दायरे में आने वाले स्कूलों के लिए होगी। इसका जिक्र राज्य सरकार ने पिछले बजट में किया था। इसके अलावा 2018 में प्रकाशित गजट नोटिफिकेशन में भी खाली पदों का जिक्र था। जिन 30 प्रतिशत उम्मीदवारों ने प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की है उनमें वह भी शामिल हैं जिन्हें अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार है। दो साल स्कूल नहीं खुले। ऐसे में विभाग ने न तो खाली पदों का आकलन किया और न ही अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति। अब जब शैक्षणिक सत्र के चार माह निकल गए हैं, तो अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। अब स्कूलों में पढ़ाई दोहराने (रिवीजन) का समय शुरू हो जाएगा। यानी पढ़ाई फिर भी मुश्किल ही है। माध्यमिक शिक्षक संवर्ग में पदोन्नति के करीब 45 हजार पद खाली हैं। ऐसे ही उच्चतर माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के 50 प्रतिशत पदोन्नति के होते हैं, जो खाली हैं।
अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल
राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में 10 फीसदी से ज्यादा प्राइमरी स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे हैं। इसकी वजह बताते हुए शैक्षणिक मामलों के जानकारों का कहना है कि 2013 के बाद से प्रदेश में अब जाकर प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती हो रही है। 9 साल के लंबे अंतराल के दौरान कई प्राथमिक शिक्षक रिटायर भी हुए हैं। 2019 में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें 7 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूलों में 20,000 पद और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में 10500 पदों के लिए शिक्षकों का चयन किया गया था। इस परीक्षा में चयनित हुए शिक्षकों की नियुक्ति का सिलसिला अभी भी जारी है। इस मामले में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना है। कि हमने यह निर्णय लिया है कि हर साल शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया जारी है। सभी की नियुक्ति भी की जा रही है।
हर साल 5 हजार होते हैं सेवानिवृत
स्कूल शिक्षा विभाग में हर साल औसत पांच हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पिछले छह साल का आंकड़ा ही देखें तो 30 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं पदोन्नति के पद भी नहीं भरे जा रहे हैं और नई भर्ती भी नहीं हो रही है। ऐसे में शिक्षक कम होना लाजिमी है। दिक्कत इस बात की भी है कि इनमें से ज्यादातर गणित, अंग्रेजी व विज्ञान विषय के शिक्षकों के पद हैं और विद्यार्थी इन्हीं विषयों में कमजोर भी हैं। इस कमी का सीधा असर विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में देखने को मिलेगा।
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