Press "Enter" to skip to content

MP Nursing News – एमपी नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा : हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी

3 महीने में मांगी रिपोर्ट, 5 जनवरी को अगली सुनवाई

ग्वालियर। नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े की जांच एमपी हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी है. बुधवार को हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई जिसमें हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता है.

जिसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपने के साथ ही मामले में 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है. जाहिर है कोर्ट के इस फैसले से नर्सिंग काउंसिल, जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी और मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी.

नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई को सौंपने के कई मायने हैं. कोर्ट ने यह मान लिया है कि मामले में गड़बड़ियां हुई हैं. इसलिए मामले की जांच देश की सबसे बड़ी एजेंसी को सौंपी गई है. आदेश के मुताबिक CBI तीन महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी.

कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि जांच में समय का खास ख्याल रखा जाए और इसके लिए तीन महीने का वक्त मुकर्रर किया गया है.5 जनवरी को अगली सुनवाई : गौरतलब है कि 35 नर्सिंग कॉलेजों में मिली गड़बड़ी के बाद कोर्ट ने भोपाल पुलिस को रिकॉर्ड जब्त करने के आदेश दिए थे.

इससे पहले प्रदेश में गैर कानूनी ढंग से संचालित हो रहे नर्सिंग कॉलेजों के मामले में राज्य शासन ने प्रदेश के 93 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता निलंबित कर दी थी. जिसमें प्रदेश की राजधानी भोपाल में संचालित हो रहे आठ नर्सिंग कॉलेज भी शामिल हैं. कोर्ट में मौजूद मध्य प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने रिकॉर्ड के संबंध में हाई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी. जिसमें महाधिवक्ता ने मामले में गड़बड़ियों के संबंध में कई तथ्य बताए.

शिकायत के मुताबिक एमपी में नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में कई स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं. इस मामले में ग्वालियर चंबल अंचल के 36 कॉलेजों ने सत्र 2019-20 का नामांकन कैंसिल कराने की मांग की है. साथ ही स्टूडेंट्स का फिर से एग्जाम लेने की भी मांग अपनी याचिका में की है. हाईकोर्ट ने पहले ही कॉलेजों के रिकार्ड में गड़बड़ी पर नाराजगी जताई थी और भोपाल के एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र चौहान ने एफिलिएशन के सारे रिकार्ड जब्त किए थे. बाद में इन्हे कोर्ट में पेश भी किया गया.

हाईकोर्ट ने इन कॉलेजों से नर्सिंग कोर्स पास करके निकलने वाले विद्यार्थियों के काम पर चिंता जताई है. – हाईकोर्ट ने कहा कि इन्हें मेडिकल की जानकारी नहीं है, ऐसे छात्र नर्स बनकर अस्पतालों में सेवाएं देते हैं. ये तो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है. यदि ऑपरेशन थियेटर में इनसे काम कराया जाता है तो क्या स्थिति बनेगी. यह मरीजों के साथ धोखा है.

ना बिल्डिंग है, ना ही हॉस्पिटल
गौरतलब है कि, ग्वालियर चंबल अंचल में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का मामला किसी से छुपा नहीं है. चंबल अंचल में 2 दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग कॉलेज है जो सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. नर्सिंग कॉलेजों के पास ना तो बिल्डिंग है और ना ही हॉस्पिटल. ऐसे नर्सिंग कॉलेज देश के अलग-अलग राज्यों से छात्रों से पैसे लेकर पास होने का भरोसा दिलाकर उनका एडमिशन करते हैं. उसके बाद सिर्फ परीक्षा के समय ही उन्हें बुलाते हैं.

Spread the love
More from Madhya Pradesh NewsMore posts in Madhya Pradesh News »
%d bloggers like this: