रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की आर्ममेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई) ने रुद्र और प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टरों के लिए स्वदेशी 20 मिमी एविएशन गन विकसित करने हेतु एसएसएस डिफेंस और कल्याणी ग्रुप को डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर (डीसीपीपी) के रूप में चुना है। यह भारत की पहली मध्यम कैलिबर एविएशन गन का स्वदेशी डिजाइन और विकास होगा।
वर्तमान में दोनों प्लेटफॉर्म यूरोपीय कंपनी केएनडीएस (पूर्व नेक्सटर) की टीएचएल-20 टरट सिस्टम पर निर्भर हैं, जिसमें 20 मिमी एम621 तोप लगी है। यह परियोजना विदेशी निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विकास चरण लगभग दो वर्ष का अनुमानित है। सफल परीक्षणों के बाद उत्पादन ऑर्डर 60:40 के अनुपात में एल-1 और एल-2 कंपनियों में बांटा जाएगा।
यह निर्णय निजी क्षेत्र की डिजाइन और विनिर्माण क्षमता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। मध्यम कैलिबर एयरक्राफ्ट गन में उच्च सटीकता, कंपन सहनशीलता और उड़ान परिस्थितियों में विश्वसनीयता की मांग होती है। एसएसएस डिफेंस और कल्याणी ग्रुप का चयन इन चुनौतियों को स्वदेशी स्तर पर हल करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देती है। कुछ एक्सपर्ट्स यह कह रहे हैं कि जब समान उपयोग के लिए पाकिस्तान व चीन 30 मिमी गन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर भारत छोटे और काम घातक कैलिबर को क्यों विकसित करने की योजना बना रहा है। इस पर भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पड़ोसी देशों के हेलीकॉप्टरों में अपेक्षाकृत बड़े कैलिबर की गन होने के बावजूद, भारत का फोकस मौजूदा प्लेटफॉर्म के अनुकूल, विश्वसनीय और पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली विकसित करने पर है। सफल होने पर यह न केवल मौजूदा बेड़े को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि भविष्य के लड़ाकू हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों के लिए आधार भी तैयार करेगा। रक्षा क्षेत्र में निजी-सार्वजनिक साझेदारी का यह मॉडल दीर्घकालिक क्षमता निर्माण का उदाहरण बन सकता है।


