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शैक्षणिक सत्र 2022-23 से प्लंबिंग विषय की पढ़ाई भी करेंगे बीटेक, बीई और आर्किटेक्चर के छात्र

Education News. इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर प्रोग्राम के छात्र अब प्लंबिंग की पढ़ाई भी करेंगे। बीटेक, बीई और आर्किटेक्चर प्रोग्राम में छात्रों को प्लंबिंग विषय की पढ़ाई करनी होगी।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से सिविल इंजीनियरिंग, इंवायरमेंटल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, इंटीरियर डिजाइनिंग प्रोग्राम में यह नया कोर्स जुड़ रहा है।
एआईसीटीई ने इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन की मांग पर नया कोर्स प्लंबिंग को जोड़ा है। इसमें छात्रों को 50 घंटों के इस कोर्स में  80 फीसदी लिखित पढ़ाई और 20 फीसदी ट्रेनिंग लैब में करनी होगी।

इसके लिए देश के कई भागों में विशेष लैब भी तैयार की गई हैं, ताकि उन्हें अच्छे से वाटर और सैनिटेशन की ट्रेनिंग दी जा सके।

एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे के मुताबिक, बीटेक, बीई डिग्री प्रोग्राम में अभी तक प्लंबिंग जैसा कोई कोर्स शामिल नहीं था। प्लंबिंग कोर्स डिप्लोमा आदि में पढ़ाया जाता था।
हालांकि इंजीनियरिंग के छात्रों को इस कोर्स से जुड़ी जानकारियां होनी चाहिए। इसीलिए इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन इस कोर्स को शुरू करने में मदद कर रहा है।
यह एक इलेक्टिव सब्जेक्ट होगा। यदि कोई छात्र इसकी पढ़ाई करना चाहता होगा तो कर सकता है।
इंजीनियरिंग में इस कोर्स की पढ़ाई इसलिए जरूरी है, ताकि बाद में नौकरी के दौरान उन्हें वाटर और सैनिटाइजेशन की सही जानकारी हो।
प्लंबिंग एक हार्डकोर स्किल आधारित कोर्स है। हालांकि आज प्लंबिंग एक बड़ी और सबसे जरूरी है। हर जगह इससे जुड़ी जानकारियों की जरूरत होती है।
अभी तक छोटे स्तर पर ही इस कोर्स को करवाया जाता था, लेकिन समय की मांग के आधार पर अब यह डिग्री प्रोग्राम का हिस्सा बन रहा है। इंजीनियरिंग के आधार पर ही पानी की पाइप से लेकर अन्य सामान तैयार होता है।
इनकी सब डिजाइनिंग का काम इंजीनियरिंग के छात्र ही करते हैं। जब उन्हें दिक्कतों और कमियों का पता होगा तो वे डिजाइनिंग के समय उसमें बदलाव करेंगे।

50 घंटे को होगा कोर्स: 

इंजीनियरिंग प्रोग्राम के छात्रों के लिए यह 50 घंटे का प्लंबिंग कोर्स होगा। इसमें 80 फीसदी थियोरी मतलब लिखित और 20 फीसदी प्रैक्टिकल का होगा। इसका पाठ्यक्रम इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है।
यही, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर कॉलेजों के शिक्षकों को ट्रेनिंग भी देंगे, ताकि वे आगे क्लासरूम में छात्रों को समझा सकें। एआईसीटीई ने अपने तकनीकी कॉलेजों को इस संबंध में सूचना भेज दी है।
वे आगे शिक्षकों की ट्रेनिंग पर काम करके इस कोर्स को नए सत्र से शुरू करवाएंगे। इसके लिए विशेष लैब भी तैयार की जा रही है, ताकि वहां ट्रेनिंग दी जा सके।

स्किल मंत्रालय 5000 संस्थानों में करवा रहा कोर्स

केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय करीब 5000 संस्थानों में प्लंबिंग को सर्टिफिकेट और पार्ट टाइम सर्टिफिकेट कोर्स करवा रहा है। इसमें प्लंबिंग क्षेत्र में काम करने वाले को ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे आगे काम कर सकें।
आज प्लंबिंग क्षेत्र में रोजगार की सबसे अधिक संभावनाएं हैं, इसलिए इस कोर्स को करने वालों की मांग भी बढ़ी है।
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