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“गेम खेलने के लिए महंगे मोबाइल का शौक” दे रहा बच्चों को गलत दिशा, माता-पिता के अकाउंट में लग रही सेंध

इंदौर। इंजीनियर पिता के अकाउंट से ४२ हजार रुपए ऑनलाइन निकाले गए तो उन्होंने साइबर सेल की मदद ली। जांच में पता चला, बेटे को गेम खेलने के लिए महंगे मोबाइल की जरूरत थी तो उसने चुपके से पिता के अकाउंट से पैसा निकाल लिया था। सच्चाई सामने आने पर परिजनों को झटका लगा। पुलिस ने भी चेतावनी देकर बच्चे को छोड़ दिया।

ऑनलाइन पढ़ाई के दौर ने नाबालिगों के हाथ में स्मार्ट फोन पहुंच गए और अब उसका जमकर दुरुपयोग भी हो रहा है। साइबर सेल में आई शिकायतों की जांच में पता चला कि नाबालिग बच्चे अपना शौक पूरा करने के लिए माता-पिता के अकाउंट में ही सेंध लगा रहे हैं। परिजन पुलिस के पास जाते हैं, लेकिन सच्चाई सामने आते ही उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है।

केस १: गेम खेलने के लिए चाहिए था नया मोबाइल

इंजीनियर के खाते से ४२ हजार रुपए ट्रांसफर हुए तो वे पुलिस के पास पहुंंचे। साइबर सेल ने जांच की तो पता चला कि १०वीं में पढ़ने वाले उनके बेटे ने ही पैसा निकाला है। बेटे की काउंसलिंग की तो उसने बताया कि उसे पबजी गेम खेलने के लिए नया मोबाइल चाहिए था, लेकिन परिजन नहीं दिला रहे थे। उसे दोस्तों ने बताया था कि पबजी गेम अच्छे से जिस मोबाइल में चलता है, वह ४२ हजार का है तो उसने राशि निकाल ली।

केस २: गेम के चक्कर में मां के खाते से निकाले १२ हजार

निजी स्कूल की शिक्षिका के बैंक खाते से १२ हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर हो गए थे। महिला की शिकायत की जांच की तो पता चला कि उनके ११ साल के बेटे ने ही राशि निकाली है। काउंसलिंग में बेटे ने बताया कि वह जो ऑनलाइन गेम खेलता है, उसके अगले चरण में जाने के लिए ई प्लेटफॉर्म से एसेसरीज खरीदने के लिए पैसों की जरूरत थी। उसने मां के बैंक पासवर्ड को चोरी कर पैसा ट्रांसफर कर लिया था।

केस ३: पिकनिक भेजने से मना किया तो ३९ हजार उड़ाए

नौकरीपेशा के क्रेडिट कार्ड से ३९ हजार रुपए निकले तो वे शिकायत लेकर साइबर सेल पहुंचे। जांच में पता चला कि ११वीं की छात्रा बेटी ने ऐसा किया है। बेटी की काउंसलिंग हुई तो पता चला कि उसे स्कूल से पिकनिक ले जा रहे थे। माता-पिता ने पिकनिक भेजने से मना किया तो उसने ही पैसा निकाल लिया था। सभी मामलों में चेतावनी देकर बच्चों को छोड़ा गया।

केस ४: टीचर की आपत्तिजनक प्रोफाइल बना दी

एक बड़े स्कूल की शिक्षिका ने उनके नाम सेे सोशल मीडिया पर प्रोफाइल बनाकर आपत्तिजनक फोटो डालने की शिकायत की थी। छानबीन की तो पता चला कि उनके क्लॉस के १०वीं के बच्चे ने ही यह हरकत की है। बच्चे को मैडम अच्छी लगती थी। एक बार मैडम ने किसी बात पर डांट दिया तो परेशान करने के उद्देश्य से उसने स्मार्ट फोन से ऐसी हरकत की।

गोपनीय कोड हासिल किया और फिर ओटीपी डिलीट कर दिया

साइबर सेल की जांच में पता चला कि बच्चों को आसानी से माता-पिता के अकाउंंट, क्रेडिट कार्ड के गोपनीय नंबर पता चल जाते हैं। स्क्रीन लॉक खोलने का तरीका भी पता रहता है। परिजनों की जानकारी के बगैर उनके कार्ड का इस्तेमाल ऐसे समय पर किया, जब वे वॉश रूम में थे। मोबाइल पर ओटीपी आया तो उसे देख तुरंत डिलीट कर दिया, ताकि पालक को पता न चल सके।

अपने क्रेडिट-डेबिट कार्ड को लेकर अत्यंत गंभीर होने की जरूरत
कई मामलों में नाबालिग बच्चे ही माता-पिता के अकाउंट से राशि निकाल लेते हैं। शिकायत की जांच मेें हरकतें सामने आती हैं। हर किसी को अकाउंट, क्रेडिट- डेबिट कार्ड को लेकर अत्यंत गंभीर होने की जरूरत है।
जितेंद्रसिंह, एसपी साइबर सेल

यह बरतें सावधानी
– क्रेडिट कार्ड को नकद राशि की तरह सुरक्षित रखें।
– अपने गैजेट्स लैपटॉप, मोबाइल के स्क्रीन लॉक को नितांत व्यक्तिगत रखें, किसी से शेयर न करें।
– बैंक के ट्रांजेक्शन डिटेल की एसएमएस सेवा को एक्टिव रखें और लगातार जानकारी लेते रहें।
– बच्चों की गतिविधियों व मोबाइल उपयोग पर भी नजर रखें।

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