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भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम – पीएम मोदी

तुम मुझे आईडिया दो – मैं तुम्हें अवसर दूंगा – मुख्यमंत्री श्री चौहान
दिल में जोश हो, नई उमंग हो, इनोवेशन का जज्बा हो तो इसका असर साफ नजर आता है
इंदौर जिले के किसान केमिकल मुक्त खेती, प्राकृतिक खेती के मामले में भी देश के सामने एक आदर्श बन सकता है
इंदौर. मप्र स्टार्टअप कॉन्क्लेव का कार्यक्रम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल रूप से कार्यक्रम में जुड़े हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश स्टार्टअप नीति का वर्चुअल शुभारंभ किया।
इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाषण दिया और जय मध्यप्रदेश, जय इंदौर के नारे से शुरुआत की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित करते हुए कहा कि जब दिल में जोश हो, नई उमंग हो और इनोवेशन का जुनून हो तो सब संभव है। युवा नई ऊर्जा के साथ देश के विकास को गति दे रहे हैं।

मप्र की स्टार्टअप नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार और युवाओं को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि कम समय में देश में स्टार्टअप की दुनिया ही बदल गई है।
दुनिया का सबसे बड़ा ईको सिस्टम है, यूनिकॉर्न हब में भी हम एक ताकत के रूप में उभर रहे हैं। भारत में स्टार्टअप का जितना बड़ा वॉल्यूम है उतनी ही बड़ी डायवर्सिटी भी है। इंदौर सफाई की तरह प्राकृतिक खेती में भी सिरमौर बने।
मोदी ने कहा कि स्टार्टअप हमें कठिन चुनौती का सरल समाधान देता है। आज कृषि और रिटेल बिजनेस आदि के क्षेत्र में नए स्टार्टअप सामने आ रहे हैं। दुनिया में भारत के स्टार्टअप की प्रशंसा होती है।

आठ साल पहले तक जो स्टार्टअप शब्द कुछ गलियारों में ही चर्चा का हिस्सा था, वह आज सामान्य भारतीय युवा के सपने सच करने का माध्यम कैसे हो गया, यह अचानक नहीं आया।

एक सोची समझी रणनीति, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित दिशा का परिणाम है। आज देश में जितनी प्रोएक्टिव स्टार्टअप नीति है उतना ही परिश्रमी स्टार्टअप नेतृत्व भी है। इसलिए देश एक नई युवा ऊर्जा के साथ विकास को गति दे रहा है।
मोदी ने कहा कि आपको याद होगा कि 2014 में जब हमारी सरकार आई थी तो देश में तीन-चार सौ के करीब स्टार्टअप थे। ये शब्द सुनाई भी नहीं देता था, न चर्चा होती थ।
लेकिन आज आठ वर्ष के छोटे से कालखंड में आज देश में 70 हजार रिकॉग्नाइज्ड स्टार्टअप हैं। भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
कार्याक्रम में पहले सीएम शिवराज ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज मप्र के सैकड़ों कॉलेजों में 5 लाख से ज्यादा नौ जवान सीधे कॉलेज से जुड़े हैं।
मेरे भांजों और प्यारी भांजियों मैं कहता हूं – मेरा बेटा-बेटियों तुम मुझे आइडिया दो मैं तुम्हें अवसर दूंगा।
हमारे पास योग्यता है, इनोवेटिव आइडिया है। सही राह मिल जाए तो इंदौर कमाल करेगा। स्टार्टअप में बैंगलुरु को भी पीछे छोड़ देंगे। ये चैलेंज स्वीकार है। यह हमारा सौभाग्य है। आज देश का नेतृत्व पीएम मोदी के हाथ में है।
शिवराज ने मध्यप्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी कम करने की घोषणा की। एमपी में दिल्ली से कम ही स्टाम्प ड्यूटी लगेगी। शिवराज ने कहा- मध्य प्रदेश स्टार्टअप पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है।
हम इंदौर, भोपाल समेत अन्य शहरों को स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेंगे। हम एक जिला एक उत्पाद पर काम कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि मप्र में आज स्टार्टअप का पूरा इको सिस्टम तैयार किया है।
मेरा संकल्प है रोजगार। हर महीने रोजगार दिवस मनाते हैं। अब मप्र का नौजवान स्टार्टअप के क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार है। मप्र में विकास का पूरा इको सिस्टम तैयार है।

एमएसएमई की नई नीति लागू की है। चावल को लेकर नई नीति ला रहे हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल की नीति भी लेकर हम आ रहे हैं।

सीएम ने कहा कि मप्र में स्टार्टअप इको सिस्टम को तैयार करने का 2016 में प्रयास शुरू किया था। इस नीति के कारण इस स्टार्टअप का इको सिस्टम बना। 700 करोड़ की फंडिंग आ चुकी है।
प्रदेश के कोने-कोने से स्टार्टअप संचालित हो रहे हैं। 40% स्टार्टअप बेटियों के हैं जो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। छोटे-छोटे शहरों से बेटा-बेटी नए आइडिया लेकर आ रहे हैं।
26 जनवरी को स्टार्टअप समिट के दौरान नौजवानों के सुझावों से इस नीति को अंतिम रूप दिया है।
अगर कोई बेटियां अपना स्टार्टअप शुरू करती हैं तो उनके स्टार्टअप को बढ़ावा देने की व्यवस्था, फंड की व्यवस्था में मदद करेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा मप्र स्टार्टअप पोर्टल लॉन्च किया जा रहा है।
इससे पहले शाम करीब 6 बजे सीएम शिवराज सिंह चौहान, मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा, मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, मंत्री उषा ठाकुर मंच पर पहुंचे। जहां मंच पर सीएम का पौधे भेंट कर उनका स्वागत किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार शाम वीडियो कांफ्रेंसिंग से मप्र की स्टार्टअप नीति का शुभारंभ किया। पीएम ने बटन दबाकर वित्तीय सहायता वितरित की। उन्होंने स्टार्टअप पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
पीएम मोदी ने इंदौर के तनुतेजस सारस्वत से बात की। शॉप किराना के संस्थापक तनुतेजस सारस्वत ने बताया कि साढ़े तीन साल पहले तीन दोस्तों ने किराना दुकानों का सप्लाय चेन सिस्टम सुधारने के मकसद से स्टार्टअप की शुरुआत की थी।

उनके साथ दीपक धनोतिया और सुमित घोरावत एक ऐसा बिजनेस टू बिजनेस माडल लाना चाहते थे, जिसमें सीधे कंपनियों से माल लेकर दुकानों को 24 घंटे में डिलीवर किया जा सके।

इन्होंने ये कर दिखाया। छह राज्यों के 30 शहरों की एक लाख खुदरा दुकानों और पांच करोड़ उपभोक्ताओं तक स्टार्टअप ने पहुंच बनाई। 10 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया।
स्टार्टअप का कारोबार 800 करोड़ रुपये सालाना है। जापान और भारत के प्रमुख स्टार्टअप निवेशकों से करोड़ों रुपये की फंडिंग मिल चुकी है। पीएम मोदी ने तौसीफ खान और भोपाल की स्टार्ट अप उमंग श्रीधर से भी बात भी।
डिजाइन, प्रालि कंपनी की संस्थापक उमंग श्रीधर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स किया। वे गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। इन्होंने निफ्ट भोपाल से फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा भी किया है।
कंपनी के बारे में उमंग बताती हैं कि मैंने पांच साल पहले ही इस कंपनी को शुरू किया। पहले हमारी कंपनी कपड़ा बनाती थी और डिजाइनर और रिटेलर्स को बेचती थी।
कोरोना के बाद हमने इसमें कुछ नई चीजों जैसे कढ़ाई, सिलाई, छपाई को जोड़ा। इस वजह से हमें और भी अधिक महिलाओं के साथ काम करने का मौका मिला। पहले कंपनी से 1000 महिलाएं जुड़ी थीं। अब उसमें 350 और जुड़ गई हैं।
उमंग ने बताया कि इस कंपनी का उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं व कारीगरों को सशक्त बनाना है, उन्हें उनकी कला की सही कीमत दिलवाना है। अभी हमारी कंपनी भारत के साथ ही विदेशी कंपनियों के स्टोरों की भी आपूर्ति करती है।

इंदौर में इंदौर में ग्रामोफोन स्टार्टअप को संचालित करने वाले तौसीफ खान से भी पीएम ने बातचीत की। मध्य प्रदेश में ग्रामोफोन स्टार्टअप न केवल किसानों को बचत की राह दिखा रहा है, बल्कि कृषि भूमि को रसायनों की मार से भी बचा रहा है।

महंगे रसायनों के अनावश्यक उपयोग से किसानों को बचाकर उनकी आय वृद्धि के तमाम उपाय देना ग्रामोफोन की अवधारणा है। 2016 में छह लाख रुपये से शुरू हुए इस स्टार्टअप ने 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

इंदौर में ग्रामोफोन स्टार्टअप को संचालित करने वालों में आइआइटी और आइआइएम से निकले सुशिक्षित युवाओं की पूरी टीम है।

संस्थापक तौसीफ खान का कहना है कि बेहतर शिक्षण संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अच्छे पैकेज पर नौकरी के कई विकल्प थे, लेकिन कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में उद्यम की संभावना को चुना।
पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि गांवों, किसानों और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा काम करना है।
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