इंदौर। शहर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय इंदौर में आयुर्वेदिक उपचार की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। दिनांक 16 अप्रैल 2026 को महाविद्यालय परिसर स्थित चिकित्सालय में पेरिफेरल फ़ार्माकोविजिलेंस कॉल सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ ए पी एस चौहान एवं हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ एस के दास अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ विमल अरोरा, डॉ तेजस पोरवाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।
कार्यक्रम के दौरान डॉ अमित सिन्हा (कोऑर्डिनेटर, फार्माकोविजिलेंस सेंटर) ने कॉल सेंटर एवं पेरिफेरल फ़ार्माकोविजिलेंस की विस्तृत जानकारी देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
क्या होता है पेरिफेरल फ़ार्माकोविजिलेंस कॉल सेंटर?
पेरिफेरल फ़ार्माकोविजिलेंस कॉल सेंटर एक ऐसा सिस्टम होता है, जहां मरीज, डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी किसी भी दवा (विशेष रूप से आयुर्वेदिक औषधियों) के सेवन के बाद होने वाले साइड इफेक्ट्स (Adverse Drug Reactions) की जानकारी सीधे दर्ज करा सकते हैं।
यह केंद्र इन सूचनाओं को एकत्रित कर विश्लेषण करता है और उच्च स्तर के फार्माकोविजिलेंस नेटवर्क तक भेजता है, ताकि दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता का निरंतर मूल्यांकन किया जा सके।
इसके प्रमुख फायदे
- मरीजों की सुरक्षा बढ़ती है – दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव समय रहते पहचान में आते हैं।
- आयुर्वेदिक दवाओं पर भरोसा मजबूत होता है – वैज्ञानिक आधार पर उनकी निगरानी होती है।
- डॉक्टर्स को फीडबैक मिलता है – उपचार को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- गलत या मिलावटी दवाओं की पहचान – यदि किसी दवा में समस्या है तो जल्दी पकड़ में आती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर डेटा तैयार होता है – जिससे नीतिगत निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
इंदौर में इसका क्या होगा उपयोग?
इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य केंद्र में यह कॉल सेंटर कई स्तरों पर उपयोगी साबित होगा—
- शहर और आसपास के क्षेत्रों से आयुर्वेदिक उपचार लेने वाले मरीज अब सीधे अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकेंगे।
- मेडिकल कॉलेज के छात्रों को रिसर्च और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का अवसर मिलेगा।
- स्थानीय स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखने से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- यह केंद्र भविष्य में इंदौर को आयुर्वेदिक रिसर्च और ड्रग सेफ्टी मॉनिटरिंग का हब बनाने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी चिकित्सकों और विद्यार्थियों को इस पहल से जुड़कर अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और मरीजों को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद उपचार उपलब्ध कराएंगे।


