‘एक्सरसाइज दस्तलिक’ का सातवां संस्करण- भारत- उज़्बेकिस्तान सैन्य सहयोग का नया आयाम

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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मध्य एशिया के बदलते सामरिक परिदृश्य के बीच भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग एक नई ऊँचाई छूता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में ‘एक्सरसाइज दस्तलिक’ का सातवां संस्करण इन दिनों उज़्बेकिस्तान के नमंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जा रहा है। 12 अप्रैल से शुरू हुआ यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 25 अप्रैल तक चलेगा और दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ती सामरिक समझ को रेखांकित करता है।

यह सैन्य अभ्यास विशेष रूप से संयुक्त विशेष अभियानों (स्पेशल ऑपरेशन्स) पर केंद्रित है, जिसमें अवैध सशस्त्र समूहों के उन्मूलन जैसे जटिल परिदृश्यों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय सेना और उज़्बेकिस्तान सेना के लगभग 60-60 सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। भारतीय दल में महार रेजिमेंट के जवानों के साथ-साथ भारतीय वायु सेना के तत्व भी शामिल हैं, जो इस अभ्यास को त्रि-सेवा समन्वय का स्वरूप प्रदान करते हैं।

अभ्यास के दौरान सैनिकों को आधुनिक युद्ध कौशलों से लैस किया जा रहा है, जिसमें एंबिडेक्स्ट्रस फायरिंग, रिफ्लेक्स शूटिंग, ड्रोन (UAV) का उपयोग, शहरी युद्ध संचालन, स्नाइपर ड्रिल, टोही अभियान तथा युद्धक्षेत्र में घायल सैनिकों की निकासी (Combat Casualty Evacuation) जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। अर्ध-पर्वतीय भूभाग के अनुरूप बेसिक पर्वतारोहण प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जो वास्तविक परिस्थितियों में संचालन क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।

‘एक्सरसाइज दस्तलिक’ की एक अहम विशेषता दोनों देशों के बीच टैक्टिक्स, टेक्निक्स और प्रोसीजर्स (TTPs) का आदान-प्रदान है, जिससे ऑपरेशनल तालमेल और बेहतर होता है। साथ ही, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से आपसी विश्वास और सौहार्द को भी मजबूती दी जा रही है।

सामरिक क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार यह अभ्यास मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने की व्यापक नीति का हिस्सा है। आतंकवाद, उग्रवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों के बीच इस तरह के संयुक्त अभ्यास न केवल सैन्य तैयारी को मजबूत करते हैं, बल्कि बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग की नींव भी रखते हैं।

2019 में शुरू हुआ ‘डस्टलिक’ अभ्यास हर वर्ष नए आयाम जोड़ते हुए परिपक्व होता जा रहा है। 25 अप्रैल को इसके समापन के साथ, दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभियानों में और अधिक समन्वित एवं सक्षम होकर उभरेंगी, जो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families