भारतीय सेना की अमर परंपराएं- शतायु सैन्य योद्धा को दी आर्मी कमांडर ने सलामी

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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चंडीमंदिर कैंटोनमेंट (चंडीगढ़) । पश्चिमी कमान के मुख्यालय में एक छोटा-सा समारोह हुआ, लेकिन उसकी गहराई भारतीय सेना की उस परंपरा को उजागर करती है, जिस पर हर फौजी को गर्व है। ब्रिगेडियर वजीर सिंह चौधरी (रिटायर्ड), इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मेकैनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) कोर के शतायु सैन्य योद्धा, अपनी सौवीं वर्षगांठ मना रहे थे।

पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने खुद उनके द्वार पहुंचकर बधाई दी। मेजर जनरल सुनील रामपाल, एमजी ईएमई ने पूरे कोर की ओर से उन्हें स्मृति पदक भेंट किया। यह मात्र औपचारिकता नहीं थी, यह सेना की उस अनलिखित परंपरा का जीवंत प्रमाण था, जो वर्दी उतारने के बाद भी सैनिक को अपना मानती है।

भारतीय सेना में वयोवृद्ध सैन्य योद्धाओ का सम्मान कोई नया रिवाज नहीं। यह उस ‘एस्प्रिट डे कॉर्प्स’ का हिस्सा है, जिसने हमें 1947 से आज तक एकजुट रखा है। ईएमई कोर, जिसकी नींव आजादी के बाद रखी गई, सेना की रीढ़ है। वाहन, हथियार, इलेक्ट्रॉनिक्स, हर चीज की देखभाल इसी कोर के जिम्मे है। ब्रिगेडियर चौधरी उसी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने युद्ध के मैदान में न सिर्फ हथियार चलाए, बल्कि उन्हें जीवंत रखा। आज जब उनके जैसे वेटरन को कमांडर स्तर के अधिकारी उनके ही द्वार पहुंचकर सम्मानित कर रहे हैं, तो यह संदेश साफ है, सेवा कभी समाप्त नहीं होती, सिर्फ रूप बदलती है।

ये परंपराएं सेना को सिर्फ संगठन नहीं, परिवार बनाती हैं। जब एक जवान देखता है कि उसके बुजुर्ग को आज भी कमान स्तर का सम्मान मिल रहा है, तो उसके अंदर कर्तव्य का बीज और मजबूत हो जाता है। यह ‘इंस्टीट्यूशनल मेमोरी’ का संरक्षण है। आज के तकनीकी युद्ध के दौर में, जहां ईएमई कोर की भूमिका और बढ़ गई है, इन परंपराओं का महत्व और भी गहरा हो गया है। वे याद दिलाती हैं कि सेना की ताकत केवल हथियारों में नहीं, बल्कि उन मूल्यों में है, सम्मान, कृतज्ञता और निरंतरता, जो समय से ऊपर हैं।

ब्रिगेडियर चौधरी जैसे शतायु सैनिक हमें सिखाते हैं कि वर्दी एक बार पहन ली जाए, तो वह जीवन भर नहीं उतरती। पश्चिमी कमान का यह छोटा समारोह वास्तव में बड़ी परंपरा की याद दिलाता है, भारतीय सेना कभी किसी को अकेला नहीं छोड़ती।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families