भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का उत्तराखंड के जोशीमठ और उससे लगे फॉरवर्ड इलाकों का हालिया दौरा भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों तथा सीमा सुरक्षा की निरंतर निगरानी का महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने गढ़वाल क्षेत्र में स्थित इबेक्स ब्रिगेड तथा उत्तरी सीमा के मध्य क्षेत्र के अग्रिम इलाकों का निरीक्षण किया। यह क्षेत्र चीन सीमा के निकट होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है।
दौरे के दौरान सेना प्रमुख को ऑपरेशनल तत्परता, प्रौद्योगिकी एकीकरण, इंटर-एजेंसी समन्वय तथा युद्ध क्षमता बढ़ाने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने उच्च-उंचाई वाले कठिन भू-भाग में तैनात सभी रैंकों के सैनिकों के प्रोफेशनलिज्म और समर्पण की सराहना की। जनरल सेठ ने पांच-बिंदु वाले कंसेप्ट “विजय” को अपनाने पर जोर दिया, जो एक चुस्त, फ्यूचर रेडी फ़ोर्स के निर्माण पर केंद्रित है। यह बल अल्पकालिक सूचना पर संपूर्ण परिचालन स्पेक्ट्रम में प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम होनी चाहिए।
उन्होंने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) की हमेशा तैयार रहने वाली योजना, संयुक्त अभ्यास तथा नागरिक एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता भी रेखांकित की। साथ ही, भारत के प्रथम गांव माना का दौरा कर स्थानीय समुदाय से संवाद किया, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सेना-जन सहयोग की मिसाल सामने आई। सेना अध्यक्ष द्वारा आम बेहद कठिन परिस्थितियों (खासकर सर्दियों में) में रह रहे नागरिकों से संवाद करके उनका मनोबल काफी बढ़ा दिया है और जैसा पहले भी कई बार हो चूका है, यही जनता देश के लिए एक सुटक्षा पंक्ति भी साबित होती है।
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी बलों के बीच जारी तनाव के परिप्रेक्ष्य में यह दौरा विशेष महत्व रखता है। मध्य क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखना समग्र सीमा प्रबंधन का अभिन्न अंग है। सेना प्रमुख का यह निरीक्षण स्पष्ट करता है कि भारतीय सेना न केवल वर्तमान चुनौतियों के लिए तैयार है, बल्कि प्रौद्योगिकी और समन्वय के माध्यम से भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को भी पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीमा की रक्षा और विकास दोनों ही दिशाओं में यह संतुलित दृष्टिकोण राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाता है।


