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आज की सबसे बड़ी चिंता परमाणु हथियार की यह विश्व स्पर्धा क्यों….? 

लेखक- ओमप्रकाश मेहता
क्या विश्व अब विनाश की ओर अग्रसर है? आज जिस तरह विश्व के देशों में परमाणु हथियार एकत्र करने की जो स्पर्धा चल रही है, उससे तो यही लगता है? आज भारत सहित विश्व के नौ देशों के पास परमाणु शस्त्रागार है, शीत युद्ध के बाद से यह स्पर्धा काफी बढ़ गई है, यदि सही सिलसिला आगे भी जारी रहा और परमाणु शास्त्रागारों में इजाफा होता रहा तो फिर विश्व की जिंदगी कितने दिन की?
किसी भी दिन कोई भी देश अपने परमाणु हथियारों का उपयोग छोटे-छोटे विवादों में ही बिना सोचे-समझे करने लगेगा तो विश्व का भविष्य क्या होगा? क्या इन देशों को यह पता भी है कि परमाणु हथियार कितने व्यापक रूप से घातक और विध्वंसक होते है? और…. इनके उपयोग पर क्या हश्र होता है?
हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) थिंक टैंक ने अपने ईयर बुक 2022 के निष्कर्षों में यह गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण व यूक्रेन के लिए पश्चिमी समर्थन ने दुनिया के परमाणु हथियारों से लैस देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया है।
हथियारों, निरस्तीकरण, और अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति पर थिंक टैंक ने कहा है कि जहां एक वर्ष में परमाणु हथियारों की संख्या में थोड़ी गिरावट आई है, वहीं परमाणु शक्तियों द्वारा तत्काल कार्यवाही नहीं की जाती है तो हथियारों की वैश्विक सूची अगले दशक में पहली बार बढ़ना शुरू हो सकती है।
परमाणु हथियार सम्पन्न नौ देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजरायल और उत्तर कोरिया ने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण करना जारी रखा है, भारत के पास पिछले साल के 156 की तुलना में 2022 में 160 परमाणु हथियार हो गए है।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि विश्व के कुछ मौजूदा परमाणु हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा दो देशों रूस और अमेरिका के पास है। पिछले दिनों यूक्रेन पर रूस के विशेष सेना अभियान में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने परमाणु हथियारों को हाई अलर्ट पर रखा था, रास्ते में खड़े देशों को हस्तक्षेप की स्थिति में युक्रेन जैसी ही स्थिति करने की धमकी भी दी थी, जो उन्होंने अब तक के अपने इतिहास में कभी नही दी होगी, रूस के पास दुनिया का सबसे बड़ा शस्त्रागार है। रूस और अमेरिका के पास कुल वैश्विक परमाणु हथियारों का 90 फीसदी से भी अधिक हिस्सा है।
थिंक टैंक सीपरी ने अपनी इसी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका व रूस के अलावा सात देश नई हथियार प्रणाली विकसित कर रहे है, या ऐसा इरादा जता चुके है। उपग्रह छवियों से संकेत मिला है कि चीन 300 से अधिक मिसाइलों का निर्माण कर रहा है। वैसे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2022 में परमाणु हथियारों की वैश्विक संख्या 375 गिरकर 12 हजार 705 हो गई, जो जनवरी 22 से पहले 13080 थी, इनमें 3732 हथियार मिसाइलों और विमानों के साथ तैनात किए गए है।
थिंक टैंक सीपरी की इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस समय विश्व के नौ देशों के पास परमाणु हथियारों का जखीरा है, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किस देश के पास कितने परमाणु हथियार है, रिपोर्ट के अनुसार रूस के पास 5977, अमेरिका के पास 5428, चीन के पास 350, फ्रांस के पास 290, ब्रिटेन के पास 225, पाकिस्तान के पास 135, भारत के पास 160,  इजराइल के पास 90 तथा उत्तर कोरिया के पास 20, इस तरह कुल मिलाकर विश्व में आज इन नौ देशों के पास 12705 (बारह हजार सात सौ पांच) परमाणु हथियार है और इन्हीं के बलबूते पर हर देश अपने आपको सर्व शक्तिमान मान रहा है, किसी भी देश को इन हथियारों से होने वाले विध्वंस का भय नही है।
जबकि आज से करीब सत्तर साल पहले स्व. राष्ट्र कवि प्रदीप जी ने फिल्म जाग्रति के एक चेतावनी भरे गीत में लिख दिया था:-
‘‘एटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के एक ढेर पर बैठी है ये दुनिया
तुम हर कदम उठाना जरा देखभाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के….’’
ऐसे दूरदर्शी गीतकारों को भविष्यवक्ता से अधिक क्या कहा जाएं?
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