भारत ने रूस से एस-400 ‘सुदर्शन’ वायु रक्षा प्रणाली की चौथी स्क्वाड्रन प्राप्त कर ली है। 2018 में 5.43 अरब डॉलर की महत्वपूर्ण डील के तहत हुई इस आपूर्ति ने भारतीय वायुसेना की बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता को और सशक्त बना दिया है।
रूसी निर्मित यह अत्याधुनिक प्रणाली प्रत्येक स्क्वाड्रन में उच्च-शक्ति वाले रडार, कमांड पोस्ट और 128 मिसाइलों से सुसज्जित है। यह 400 किलोमीटर तक की दूरी पर दुश्मन के विमान, मिसाइलों तथा ड्रोनों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। वर्ष 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 ने अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया था, जब इसने पाकिस्तानी एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) को दुश्मन क्षेत्र के 300 किलोमीटर अंदर मार गिराया। इस सफलता ने न केवल सामरिक श्रेष्ठता स्थापित की, बल्कि आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों के निर्णायक महत्व को भी रेखांकित किया।
पिछली तीन स्क्वाड्रनों को पहले ही पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात किया जा चुका है, जिससे क्षेत्रीय संतुलन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चौथी स्क्वाड्रन की प्राप्ति के साथ भारतीय वायु रक्षा ढाल और अधिक मजबूत हो गई है। पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन के 2026 के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एस-400 की यह तैनाती न केवल वर्तमान खतरे के विरुद्ध ‘डिटरेंस’ प्रदान करती है, बल्कि भविष्य के संघर्षों में भी भारत को सामरिक लाभ सुनिश्चित करेगी। साथ ही, भारत स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ को तेजी से विकसित कर रहा है। एस-400 से प्राप्त अनुभव और तकनीकी अंतर्दृष्टि इस स्वदेशी कार्यक्रम को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगी।
एस-400 की चौथी स्क्वाड्रन की प्राप्ति ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह दर्शाता है कि भारत उन्नत विदेशी प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण करते हुए साथ-साथ स्वदेशी क्षमताओं का विकास भी कर रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह संतुलित रणनीति भविष्य में भारत को और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएगी।


