मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र सैन्य “जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर” अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना भारतीय सेना की पेशेवरता, मानवीय संवेदनशीलता और वैश्विक शांति प्रयासों में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) में एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल पॉइंट के रूप में तैनात मेजर बराक को यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए प्रदान किया गया है।
यह पुरस्कार केवल एक महिला अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय सैन्य अधिकारियों द्वारा निभाई जा रही बहुआयामी भूमिका का प्रतीक है। लेबनान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां सांप्रदायिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियां निरंतर बनी रहती हैं, मेजर बराक ने न केवल शांति स्थापना के पारंपरिक दायित्वों को निभाया, बल्कि लिंग-समर्थित दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए महिलाओं और कमजोर समुदायों की सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का सबसे बड़ा योगदानकर्ता देशों में से एक रहा है। दशकों से भारतीय सैनिक और अधिकारी विश्व के विभिन्न युद्ध-ग्रस्त क्षेत्रों में न केवल सुरक्षा प्रदान करते आए हैं, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के पुनर्निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। मेजर बराक की यह उपलब्धि इसी विरासत का विस्तार है। यह उन हजारों भारतीय बेटियों को प्रेरणा देती है जो राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहती हैं। भारतीय सेना ने साबित किया है कि सैन्य चरित्र और मानवीय मूल्यों में कोई विरोधाभास नहीं है, दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
आज के जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में, जहां पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ हाइब्रिड चुनौतियां और मानवीय संकट बढ़ रहे हैं, भारतीय सेना की इस क्षमता का विशेष महत्व है। महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी न केवल सेना को अधिक समावेशी बनाती है, बल्कि शांति स्थापना अभियानों को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय भी बनाती है।
मेजर अभिलाषा बराक को बधाई। उनका सम्मान पूरे भारतीय सेना और राष्ट्र का गौरव है। यह सिद्ध करता है कि भारत न केवल सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, समानता और मानवीय गरिमा के मूल्यों का भी संरक्षण करता है।


