पूर्वोत्तर भारत में सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी तवांग क्षेत्र में भारतीय सेना की ‘गजराज कॉर्प्स’ (Gajraj Corps) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक राष्ट्र-रक्षा केवल हथियारों और सीमाओं की चौकसी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमांत नागरिकों के साथ अटूट विश्वास स्थापित करना भी इसका एक रणनीतिक स्तंभ है।
समुद्र तल से 13,000 फीट से अधिक की भीषण ऊंचाई पर स्थित दूरस्थ याक-चारागाह (Yak-Grazing Settlement) बस्तियों में सेना द्वारा आयोजित चिकित्सा एवं सहायता शिविर महज़ एक जनकल्याणकारी गतिविधि नहीं, बल्कि ‘सिविल-मिलिट्री कोऑपरेशन‘ (नागरिक-सैन्य सहयोग) का एक उत्कृष्ट वैश्विक उदाहरण है।
रणनीतिक एवं मानवीय महत्व
- हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर का अनूठा संतुलन: अत्यधिक दुर्गम इलाके, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कठोर मौसम जीवन को अत्यंत कठिन बना देता है, वहाँ आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ, नि:शुल्क दवाएँ और राशन सामग्री उपलब्ध कराना सीमांत आबादी के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होता है।
- इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रथम पंक्ति: सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिक देश की ‘फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ होते हैं। सेना का यह संवेदनशीलता से परिपूर्ण रवैया स्थानीय समुदायों में सुरक्षा और जुड़ाव की भावना को सुदृढ़ करता है।
- हाइब्रिड वॉरफेयर का मुंहतोड़ जवाब: जब पड़ोसी देश सीमाओं पर जनसांख्यिकीय व कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, तब ऐसे मानवीय प्रयास आंतरिक एकजुटता को अभेद्य बनाते हैं।


