भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ की हालिया काठमांडू यात्रा ने भारत-नेपाल रक्षा संबंधों की गहराई को एक बार फिर रेखांकित किया है। 16 से 19 अगस्त तक की इस आधिकारिक यात्रा के दौरान 17 अगस्त को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने उन्हें नेपाली सेना के मानद जनरल का पद प्रदान किया। यह सम्मान 1950 से चली आ रही विशिष्ट सैन्य परंपरा का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत दोनों देशों के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद जनरल का दर्जा दिया जाता है। यह परंपरा आपसी विश्वास, पेशेवर सम्मान और सैन्य भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।
जनरल सेठ ने नेपाली सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया, शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल से मुलाकात की। दोनों सेना प्रमुखों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। यात्रा के अंतिम चरण में पोखरा में पूर्व सैनिक रैली का आयोजन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। वहाँ भारतीय सेना के पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके परिवारों द्वारा भारतीय राष्ट्रगान गाने तथा तिरंगे के सम्मान का भावुक दृश्य दोनों देशों के गहरे जन-जन के रिश्ते को दर्शाता है।
भारत और नेपाल के संबंध सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और सैन्य बंधनों पर आधारित हैं। गोरखा सैनिकों का भारतीय सेना में योगदान इस संबंध की मजबूती का प्रमाण है। समय-समय पर राजनीतिक उतार-चढ़ाव ने इन संबंधों को प्रभावित किया है, विशेषकर 1980 के दशक के उत्तरार्ध में (राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए) व्यापार-पारगमन विवादों ने तनाव उत्पन्न किया था। फिर भी सैन्य स्तर पर सहयोग निरंतर बना रहा। वर्तमान में नेपाल में अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है, जिसमें हिंदू राष्ट्र की स्थिति बहाल करने की आवाजें भी शामिल हैं। ऐसे में सैन्य कूटनीति और जन-संपर्क दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
जनरल सेठ की यह यात्रा रक्षा सहयोग को और गहरा करने का अवसर प्रदान करती है। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत-नेपाल सैन्य साझेदारी न केवल दोनों देशों के हित में है, बल्कि हिमालयी क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। परंपरा का यह निरंतरता भरोसे का संदेश देती है।


