Arti के पांच अंग होते हैं, जानिए कैसे करें भगवान की आरती

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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आरती करने की विधि प्रत्येक देवी-देवता की पूजन के पश्चात हम उनकी आरती करते हैं। आरती को ‘आरार्तिक’ और ‘नीराजन’ भी कहते हैं। पूजन में जो हमसे गलती हो जाती है आरती करने से उसकी पूर्ति हो जाती है। पुराण में कहा है – मंत्रहीनं क्रियाहीनं यत;पूजनं हरे: ! सर्वे सम्पूर्णतामेति कृते नीराजने शिवे। ! – अर्थात पूजन मंत्रहीन और क्रियाहीन होने पर भी (आरती) नीराजन कर लेने से सारी पूर्णता आ जाती है। आरती ढोल, नगाड़े, शंख, घड़ियाल आदि महावाद्यों के तथा जय-जयकार के शब्द के साथ शुद्ध पात्र में घी या कपूर से अनेक बत्तियां जलाकर आरती करनी चाहिए। ततश्च मूलमन्त्रेण दत्वा पुष्पांजलित्रयम् । महानीराजनं कुर्यान्महावाधजयस्वनै: !! प्रज्वालयेत् तदार्थ च कर्पूरेण घृतेन वा।

आरार्तिकं शुभे पात्रे विष्मा नेकवार्तिकम्।! एक, पांच, सात या उससे भी अधिक बत्तियों से आरती की जाती है। आरती के पांच अंग होते हैं, प्रथम दीपमाला से, दूसरे जलयुक्त शंख से, तीसरे धुले हुए वस्त्र से, चौथे आम और पीपल के पत्तों से और पांचवे साष्टांग दण्डवत से आरती करना चाहिए। कैसे करें भगवान की आरती :- आरती करते समय भगवान की प्रतिमा के चरणों में आरती को चार बार घुमाएं, दो बार नाभि प्रदेश में, एक बार मुखमंडल पर और सात बार समस्त अंगों पर घुमाएं।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।
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