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Sadbhawna Paati Editorial – (सर्वोच्च न्यायालय में अपील) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का उपयोग गैरकानूनी….?

देश की सबसे बड़ी अदालत में हाल ही में एक वरिष्ठ वकील द्वारा एक याचिका दायर की गई है जिसमें माननीय न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन द्वारा जो मतदान प्रक्रिया पूरी करवाई जा  रही है, वह पूर्णतः गैर-कानूनी है.

क्योंकि इस प्रक्रिया को संसद से कानूनी मान्यता मिली ही नही है और संसद ने इस सम्बंध में कोई कानून पारित ही नही किया है, इसलिए मांग की गई है कि चुनाव की इस प्रक्रिया पर तत्काल बंदिश लगाई जाए एवं मतपत्रों की पुरानी प्रक्रिया से ही चुनाव करवाये जाऐ.

याचिका में यह भी मांग की गई है कि अगले माह जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, उनमें भी इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के उपयोग पर बंदिश लगाई जाये।

इस याचिका को देखकर स्वयं सर्वोच्च न्यायालय अचम्भित है, क्योंकि आजादी के बाद से अब तक विशेषकर इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग  मशीन के उपयोग की शुरूआत से लेकर अब तक इस पर कानूनी रूप से विचार नही किया, किंतु अब यह याचिका मिलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मसले पर गौर करने का आश्वासन दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील एम.एल. शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 61ए जो इवीएम के इस्तेमाल की अनुमति देती है.

आज तक संसद ने पारित नहीं किया है, इसलिए इस कानून को लागू नहीं किया जा सकता, याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून के इस प्रावधान को अमान्य, अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है.

साथ ही इस प्रक्रिया के द्वारा अब तक सम्पन्न चुनावों की वैधानिकता पर भी गंभीर विचार करने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन की अध्यक्षता वाली पीठ में दायर इस याचिका पर माननीय न्यायालय ने विचार की स्वीकृति प्रदान करते हुए कानूनी रूप से  गंभीर चिंतन कर फैसला देने का याचिकाकर्ता को आश्वासन दिया है। अर्थात् इस याचिका को शीघ्र ही सूचीबद्ध कर उस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है पिछले कुछ महीनों से विभिन्न राजनीतिक दलों तथा विभिन्न संगठनों द्वारा चुनावों के दौरान अपनाई जा रही मतदान प्रक्रिया पर आपत्ती दर्ज कराई जा रही है तथा इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीनों द्वारा करवाये जा रहे मतदान को गैरकानूनी बताया है,

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मतदान प्रक्रिया पर कानूनी रूप से विस्तृत विचार करने के आश्वासन के बाद इस विवाद के भावी फैसले को लेकर कई अटकलों का दौर प्रारंभ हो गया है।

सबसे अधिक चिंतित वे राजनीतिक दल है जो सत्ता में है तथा इसी मतदान प्रक्रिया के माध्यम से बहुमत पाकर अपनी सरकारें चला रहे है, इनको मुख्य चिंता यह है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय ने इस चुनावी प्रक्रिया से विजयी उम्मीदवारों के बारे में कोई कड़ा रूख अपनाकर फैसला दे दिया तो फिर क्या होगा?

क्या फिर देश की केन्द्र व मौजूदा राज्य सरकारों पर वैधानिक संकट सामने नहीं आएगी? फिर क्या पूरे देश में नए सिरे से मतपत्रों द्वारा मतदान करवाया जाएगा?

अब यह सब तो सर्वोच्च न्यायालय के रूख पर निर्भर है, किंतु यह सही है कि यदि सर्वोच्च न्यायालय इलेक्ट्राॅनिक मशीन वोटिंग को गैर कानूनी मानता है तो फिर इस प्रक्रिया से विजयी उम्मीदवारों (सांसदो-विधायकों) के भविष्य के सामने भी प्रश्नचिन्ह तो लग ही जाएगा? और फिर सर्वोच्च न्यायालय का वह फैसला अब तक के न्यायालयीन व कानूनी इतिहास का सबसे अधिक चर्चित व नया इतिहास रचने वाला फैसला होगा।

….या यह भी संभव है कि इतना बड़ा विवाद पैदा करने की अपेक्षा सुप्रीम कोर्ट भारतीय चुनाव आयोग व केन्द्र सरकार को इस चुनावी प्रक्रिया को संसद से पारित करवाकर कानून बनाने और उसे कानूनी मान्यता मिलने के बाद अगले चुनाव सम्पन्न कराने के निर्देश जारी कर दें?

जो भी हो…. किंतु फिलहाल तो सुप्रीम कोर्ट को दी गई इस यचिका ने विधि-न्याय और राजनीतिक तीनों क्षेत्रों में गंभीर हलचल पैदा कर दी है, अब इस पर सुप्रीम कोर्ट के रूख पर ही सब कुछ निर्भर है, जिसकी बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही है।

किंतु अब कानूनी सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्या चुनाव आयोग अब मौजूदा परिस्थिति में अगले माह पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणीपुर, गोवा और उत्तराखण्ड राज्यों की विधानसभाओं के लिए घोषित चुनाव कार्यक्रम को रोक सकता है? और यदि इस प्रक्रिया पर विचार के चलते चुनाव ईवीएम से सम्पन्न हो गए तो उनका भविष्य क्या होगा? इस सब सवालों के जवाब सुप्रीम कोर्ट के रूख पर निर्भर है।

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