DHL इंफ्राबुल के संतोष सिंह, संजीव जायसवाल और अनिरुद्ध देव पर EOW में धोखाधड़ी की FIR दर्ज

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भोपाल / इंदौर।
रियल एस्टेट सेक्टर में देश ने सहारा समूह जैसे बड़े नामों को देखा है, जिन पर भारी-भरकम आयोजनों, दिखावे और राजनीतिक रसूख की आड़ लेकर जनता और शासन को धोखा देने के आरोप लगे। अब मध्य प्रदेश में इसी तरह का एक “छोटा सहारा मॉडल” उभरकर सामने आया है—नागपुर मूल की रियल एस्टेट कंपनी DHL इंफ्राबुल, जिसके संचालकों पर शासन से बंधक रखी जमीन को अवैध रूप से बेचने, निवेशकों को गुमराह करने और कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। इन आरोपों को प्रारंभिक जांच में सही पाते हुए EOW भोपाल ने कंपनी के संचालक संतोष कुमार सिंह, संजीव जायसवाल और अनिरुद्ध देव के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

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यह मामला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता द्वारा आइकॉन लैंडमार्क–01 और –02 से जुड़े दस्तावेज़ EOW को उपलब्ध कराए गए। जांच में पाया गया कि इन दोनों कालोनी में कुल 249 भूखण्ड शासन/कॉलोनी सेल के समक्ष बंधक रखे गए थे, लेकिन कंपनी ने इनमें से 15 बंधक भूखण्डों को बिना किसी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त किए बेच दिया। शासन के स्वामित्व में दर्ज भूखंडों को अवैध रूप से तीसरे पक्ष के नाम रजिस्ट्री कर देना भारतीय दंड संहिता के अनुसार गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है। इसी आधार पर EOW ने कंपनी के संचालकों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120-B के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।


15–20 साल पहले शुरू हुआ विस्तार, अब खुल रहे हैं कारनामे

मध्य प्रदेश में DHL इंफ्राबुल का विस्तार पिछले डेढ़ दशक में लगातार हुआ। बड़े आयोजनों, भारी प्रचार-प्रसार, जमीन कारोबारी बैठकों और राजनीतिक नजदीकियों का दावा करके कंपनी ने जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की। बताया जाता है कि कंपनी ने 30 से अधिक कॉलोनियाँ विकसित करने का दावा किया, जिनमें से कई में कंप्लीशन प्रमाणपत्र जारी होने के बावजूद स्थानीय निकायों को हैंडओवर नहीं किया गया। कई कॉलोनियां आज भी सड़क, नाली, पानी, बिजली और स्ट्रीट लाइट जैसी अनिवार्य सुविधाओं से वंचित हैं।

निवासियों की शिकायतें अलग-अलग जिलों में बढ़ती रहीं, लेकिन आधिकारिक कार्रवाई अब जाकर शुरू हुई है। EOW में दर्ज FIR को कंपनी की कार्यशैली का पहला बड़ा कानूनी आकलन माना जा रहा है।


“यह मध्य प्रदेश है, यहाँ देर हो सकती है पर अंधेर नहीं”

राजनीतिक रसूख और बड़े दावों के बूते काम करने वाले कई बिल्डरों को यह भ्रम रहता है कि प्रभाव और दबाव के बल पर प्रशासन को प्रभावित किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान में प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार है, जहाँ प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्तर पर नियम और कानून से समझौता नहीं होगा।

DHL संचालकों द्वारा अपने आप को “केंद्रीय नेताओं के करीबी” बताने की चर्चाओं के बीच यह FIR यह संकेत भी देती है कि मध्य प्रदेश पुलिस और EOW किसी भी प्रभाव से ऊपर उठकर कार्रवाई करने को प्रतिबद्ध हैं।

राज्य के अनुभवी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “यहाँ किसी मामले में देर हो सकती है, पर अंधेर नहीं होता।”  यही कारण है कि दस्तावेज़ों की विस्तृत जांच के बाद FIR दर्ज करके मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।


और भी हैं कई शिकायतें — कई जिलों में पीड़ितों की भीड़

सूत्रों के अनुसार, केवल आइकॉन लैंडमार्क का मामला ही अकेला नहीं है। इंदौर, सीहोर और भोपाल में कई निवेशक अपनी शिकायतें लेकर रेरा प्राधिकरण, जिला कलेक्टरेट और पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।

कई शिकायतों में आरोप है कि— कॉलोनियों में विकास कार्य पूरे नहीं हुए,  कॉलोनी का हैंडओवर नहीं दिया गया, बंधक भूखंडों को बेचा गया, सुविधाओं का वादा करके पैसा लिया गया पर काम नहीं हुआ, गलत जानकारी देकर प्लॉट बेचे गए, पीड़ितों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की जांच आवश्यक है।


DHL कॉलोनियों पर पहले भी उठे थे सवाल – जमीनी पड़ताल की पुष्टि

कई महीनों से राज्य में विभिन्न क्षेत्रों से DHL इंफ्राबुल की कॉलोनियों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई कॉलोनियों के निवासी खराब सड़कों, सीवेज, पानी की आपूर्ति और हैंडओवर न होने से परेशान हैं।

इस स्थिति की पुष्टि उस समय हुई जब हमारे मीडिया संस्थान ने जमीनी जांच करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग, वीडियो बयानों और कॉलोनी की वास्तविक तस्वीरें प्रकाशित कीं।
रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि: कॉलोनियों का विकास अधूरा है, सुविधाएँ नहीं हैं, निवासियों को बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, कई जगह कॉलोनी के अंदर सड़कें न के बराबर हैं, इन रिपोर्टों के बाद मामला और गंभीरता से उभरकर सामने आया, जिससे विभिन्न विभागों का ध्यान इस ओर गया।


EOW की जांच में क्या मिला?

EOW की प्रारंभिक जांच में निम्न महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए:

1. बंधक सूची की पुष्टि –  249 भूखंड शासन के समक्ष बंधक दर्ज थे, जिन्हें बेचना पूर्णतः अवैध है।

2. भूखंडों का विक्रय – बिना अनुमति 15 बंधक भूखंड अन्य व्यक्तियों के नाम बेच दिए गए और रजिस्ट्री कर दी गई।

3. शासन का नुकसान – बंधक संपत्ति की सुरक्षा अपेक्षित होने के बावजूद कंपनी ने शासन की गारंटी को भंग किया।

4. दस्तावेज़ों में संभावित हेरफेर – प्राथमिकदृष्टया दस्तावेजों, विकास अनुमतियों और बंधक विवरण में विसंगतियाँ पाई गईं।

5. IPC की धाराएँ लागू –धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की पुष्टि होने पर प्रकरण दर्ज किया गया।


अब आगे क्या?

EOW द्वारा FIR दर्ज करने के बाद अब अगला चरण विस्तृत विवेचना का है। इसमें— रजिस्ट्री शाखा के दस्तावेज, नगर निवेश विभाग के रिकॉर्ड, रेरा अनुमतियाँ, बंधक भूखंडों की सूची, खरीदारों के बयान, कॉलोनी की वास्तविक स्थिति

—सबकी जांच की जाएगी। यह भी संभव है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी नाम इसमें जुड़ें, या अन्य कॉलोनियों पर भी कार्रवाई की जाए।


निष्कर्ष

DHL इंफ्राबुल पर दर्ज हुई यह FIR केवल एक रूटीन कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती अनियमितताओं पर कड़ा संदेश है। लंबे समय से परेशान निवेशकों और निवासियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है। शासन की बंधक जमीन बेच देना किसी भी स्थिति में हल्का अपराध नहीं है, और FIR दर्ज होना संकेत देता है कि अब इस मामले में गंभीर कार्रवाई अनिवार्य है। आगे की विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, वे मध्य प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

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